जिला प्रशासन के उच्चाधिकारी का एक आदेश हुआ और मनमोहन पार्क चौराहा पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त हो गया। कर्नलगंज थाने की पुलिस इतनी ज्यादा मुस्तैद है कि वहां पांच दिन से रोड पटरी पर एक भी दुकानें नहीं लगने दे रही लेकिन मनमोहन पार्क से चंद कदम की दूरी पर कटरा बाजार की सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए कर्नलगंज थाने की पुलिस मुस्तैदी नहीं दिखा रही है। इसका कारण यह हो सकता है कि शायद कटरा बाजार से उच्चाधिकारी न उनके परिवार का कोई सदस्य न गुजरता हो या फिर दुकानदारों की कर्नलगंज थाने में ‘सेटिंग’ हो। तभी को मनमोहन पार्क से अतिक्रमण हटवाने वाले कर्नलगंज थाने के इंस्पेक्टर की नजरें कटरा बाजार को अतिक्रमण मुक्त कराने पर नहीं जा रही है।
नगर निगम शहर के किसी भी हिस्से में अतिक्रमण हटाता तो उसके बाद वहां दोबारा कब्जा न हो, इसकी जिम्मेदारी संबंधित थाने की होती है। इस संबंध में हाईकोर्ट का आदेश भी है लेकिन ऐसा कहीं भी नहीं होता, जब नगर निगम अतिक्रमण हटाए और वहां दोबारा कब्जा न हो। तोड़ू दस्ते के जाते ही फिर से रोड पटरियों, सड़कों पर कब्जा हो जाता है। यह भी सच्चाई है कि संबंधित थाने की पुलिस चाह ले तो रोड पटरी, सड़क पर अतिक्रमण हो ही नहीं सकता। इसका ताजा उदाहरण है कटरा का मनमोहन पार्क चौराहा। करीब पांच दिन पहले जिला प्रशासन के एक उच्चाधिकारी सुबह उधर से गुजर रहे थे। सड़क पर लगे जाम में उनकी गाड़ी फंस गई।
साहब को यह नागवार गुजरा और उसी दिन कुछ ही देर में वहां ट्रैफिक पुलिस के अफसर, कर्नलगंज थाने के इंस्पेक्टर दलबल के साथ पहुंच गए। नगर निगम के तोड़ू दस्ते को भी बुला लिया गया और घंटेभर के भीतर चौराहा के चारों तरफ रोड पटरी पर लगी दुकानें हटा दी। कुछ तोड़ी भी गई। फोटो स्टेट की दुकानों के सामने बना चबूतरा भी उखाड़ दिया गया।
वहां दोबारा अतिक्रमण नहीं हो सका क्योंकि पुलिस बराबर निगरानी कर रही है लेकिन कटरा बाजार की स्थिति बेहद खराब है। यहां रोड पटरी से लेकर सड़क तक पर कब्जा कर दुकानें लगाई जाती हैं। दोपहर से रात तक सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल होता है।
पिछले माह नगर निगम ने यहां अतिक्रमण भी हटाया लेकिन कर्नलगंज थाने की पुलिस ने यहां वह मुस्तैदी नहीं दिखाई, जो मनमोहन पार्क के पास दिखाई जा रही है। नतीजा है कि कचहरी रोड से कटरा चौराहा होकर विश्वविद्यालय मार्ग चौराहा तक जाने वाली सड़क पूरी तरह अतिक्रमण के घेरे में है।