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सीजन की सब्जियों का बाजार गरम

Mon, 18 Jan 2016 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
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ठंड के इस सीजन के बावजूद हरी सब्जियों का बाजार गरम है। आम तौर पर माना जाता है कि दिसंबर से फरवरी के बीच में हरी मटर, टमाटर, बैगन, फूल गोभी, पत्ता गोभी जैसे सब्जियां काफी सस्ती हो जाती हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। खासकर हरी मटर, टमाटर और बैगन का भाव आसमान पर है। फूल गोभी, पत्ता गोभी, पालक, सरसो, बथुआ, मूली का साग जैसी सब्जियों की कीमत अभी कम है, लेकिन 27 जनवरी से लगन तेज होने और माघ मेला के पूरे शबाब पर आने के साथ सब्जियों की कीमतों में इजाफा होना तय माना जा रहा है।
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मुंडेरा स्थित थोक मंडी में हरी मटर 20 से 25 रुपये, टमाटर 12-14 रुपये, बैगन 10-12 रुपये प्रतिकिलो के भाव बिक रहा है। इसका असर खुदरा बाजार पर है। थोक मंडी में भाव अधिक होने के कारण खुदरा बाजार में हरी मटर अब तक 40 रुपये प्रतिकिलो से नीचे नहीं आई है। टमाटर भी 25-30 रुपये और बैगन 20-25 रुपये किलो के भाव बिक रहा है। इसकी अपेक्षा फूल गोभी, पत्ता गोभी और विभिन्न तरह के साग की कीमत काफी कम है। गोभी 2-4 रुपये पीस तो पालक, सरसो, बथुआ, मूली का साग 1-2 रुपये गड्डी के भाव बिक रहा है, सो खुदरा बाजार में भी फूल गोभी एवं पत्ता गोभी 8-10 रुपये पीस, साग चार-पांच रुपये गड्डी बिक रहे हैं, लेकिन ऐसा ज्यादा दिन रहने की उम्मीद नहीं है।

ऐसा इसलिए कि एक तो इस बार पूरा दिसंबर और उसके बाद आधा जनवरी बीतने तक ठंड काफी कम रही। इसकी वजह से मटर, टमाटर, बैगन की लोकल फसल खराब हुई। दूसरे अब लगन शुरू होने जा रही है। साथ ही माघ मेला भी अगले कुछ दिनों में चरम पर पहुंच जाएगा। इसकी वजह से सब्जियों की मांग बढ़ेगी। आवक कम होने के कारण थोक और खुदरा बाजार में अगले दस दिनो में सब्जियों का भाव बढ़ने की पूरी संभावना है। मुंडेरा फल सब्जी व्यापार महासंघ के अध्यक्ष सतीश चंद्र कुशवाहा का कहना है कि  ठंड कम पड़ने से इलाहाबाद, कौशाम्बी, फतेहपुर, प्रतापगढ़ समेत आसपास के इलाकों में मटर, टमाटर, बैगन की फसल खराब हो गई। ठंड समय से पड़ती तो वर्तमान में थोक में मटर की कीमत 8-10 रुपये और टमाटर एवं बैगन 4-5 रुपये किलो के भाव बिकता। खुदरा बाजार में मटर 20-25 रुपये, टमाटर 10-15 रुपये और बैगन भी तकरीबन इसी भाव बिक रहा होता।
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उनका कहना है कि किसान एक सीजन में खेत से मटर को कम से कम तीन बार तोड़ते हैं, लेकिन इस बार ठंड और कोहरा होने से फसल प्रभावित हुई। एक बार मटर तोड़ने के बाद ही पेड़ खराब हो गए। बताया कि वर्तमान में मटर पंजाब, उत्तराखंड समेत जबलपुर, बरेली से तो टमाटर बंगाल, छत्तीसगढ़ समेत नासिक, रायपुर, दुर्ग, रांची से आ रहा है।
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