चाहे खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए मसाले लेने हो, या घर के इंटीरियर को नया लुक देने के लिए सजावटी सामान, घर के पूजा स्थल की शोभा बढ़ाने के लिए रुद्राक्ष, शंख, चंदन लेना हो, इन सबके लिए आपको अलग-अलग भटकने के लिए जरूरत नहीं है। संगम की रेती पर बसे माघ मेले में आपको सब कुछ मिल जाएगा। जरूरत है तो थोड़ा नजरों को घुमाने की। माघ मेले में विभिन्न प्रांतों की लोक संस्कृतियों के साथ ही घर गृहस्थी से जुड़ी हर छोटी बड़ी जरूरत के सामानों का भी संगम हो रहा है। परेड ग्राउंड से लेकर संगम नोज तक सैकड़ों दुकानें सजी हुई हैं।
मिर्जापुर, प्रतापगढ़, कौशाम्बी, कानपुर आसपास के क्षेत्रों से लेकर राजस्थान, गुजरात, बिहार, झारखंड जैसे दूर-दराज के प्रांतों से रोजी रोटी की आस में आए दुकानदार आपके लिए बहुत कुछ अपने साथ लेकर आए हैं। मेले में आपको वह सब कुछ मिल जाएगा जो आपको बड़े-बड़े शोरूम में नहीं मिलेगा। सबसे खास यह कि यहां हर वर्ग के लिए बहुत कुछ है।
चिप्स कटर से लेकर गुझिया और पापड़ बनाने के सांचे, लोहे की कड़ाही, चौका बेलन, छोटी-छोटी थालियों से लेकर बड़ी-बड़ी परात सब कुछ आपके लिए हाजिर है। राजस्थान से आए राजेश ने बताया कि वह बहुत सारे बर्तन बनाकर ले आए हैं। इसके साथ ही लोगों की पसंद के हिसाब से भी वह सामान तैयार करके दे रहे हैं। तरह-तरह के शंख, विभिन्न मुख वाले रुद्राक्ष की मालाओं के साथ तुलसी, स्फटिक, कमल के फूल की मालाएं, चंदन, रोली, आसनी आदि आसानी से मिल जाएंगे।
माघ मेला ज्वैलरी हब भी बना हुआ है। लेटेस्ट फैशन से जुड़ी हरेक ज्वैलरी आपको असानी से मिल जाएगी। फंकी ज्वैलरी, ट्रेडिशनल ज्वैलरी आदि आपको सभी कुछ मिल जाएगी। अपनी जरूरत के हिसाब से आप बारगेनिंग भी कर सकती हैं। परेड ग्राउंड में ज्वैलरी और कास्मेटिक विक्रेता कविता ने बताया कि मेले में आने वाली भीड़ का आधे से ज्यादा हिस्सा महिलाओं और युवतियों का है। ऐसे में उनकी जरूरत और फैशन से जुड़े सामानों की दुकानें लगाना आमदनी का बेहतर जरिया है।