शहर में काफी लोगों ने बड़ी-बड़ी बहुमंजिला इमारतें तो खड़ी कर ली हैं लेकिन वहां न पेड़ लगाए गए हैं न ही भूजल रिचार्ज करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और न ही पार्किंग की व्यवस्था है। ऐसी जिन इमारतों में पार्किंग बनी है तो उसका भी व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है। ऐसी इमारतों से नगर निगम गृहकर के साथ भारी-भरकम प्रमोशनल सरचार्ज और शास्ति अधिरोपित शुल्क वसूल रहा है।
जिन व्यावसायिक भवनों में इसमें से किसी के चीज भी व्यवस्था है और वह चालू हालत हैं तो निगम प्रमोशनल रिबेट भी दे रहा है। जिन लोगों ने मांगने के बावजूद नगर निगम को भवन का विवरण स्वत: नहीं दिया है, ऐसे भवन स्वामियों पर शास्ति अधिरोपित किया गया है। निगम ने नए बिलों में यह शुल्क लागू भी कर दिया है।
शहर को प्रदूषण मुक्त करने के लिए हरियाली और भूजल रिचार्ज करने के लिए रेन वाटर सिस्टम अनिवार्य किया गया है। इसके साथ व्यावसायिक भवनों में पार्किंग होना भी अनिवार्य है।
बार-बार की चेतावनी के बावजूद इसकी व्यवस्था न करने पर निगम ने गृहकर बिल में प्रमोशनल सरचार्ज, प्रमोशनल रिबेट और शास्ति अधिरोपित कर दिया। प्रमोशनल सरचार्ज भवन के वार्षिक मूल्यांकन पर दो प्रतिशत की वृद्धि की गई है। जिन भवनों के 40 फीसदी हिस्से में हरियाली, भूजल रिचार्ज या पार्किंग की व्यवस्था हैं और वह चालू हालत में है तो ऐसे भवनों को प्रमोशनल रिबेट के रूप में वार्षिक मूल्यांकन पर दो फीसदी छूट भी दी जा रही है। जिन लोगों ने मांगने के बावजूद भवन का विवरण स्वत: नहीं दिया है, ऐसे भवन स्वामियों पर शास्ति अधिरोपित किया गया है।
इसके तहत 50 वर्गमीटर तक के व्यावसायिक भवन पर 100 रुपये, 200 वर्गमीटर तक के भवन पर 1000 रुपये, 400 वर्गमीटर तक के भवन पर 5000 रुपये और उससे अधिक क्षेत्रफल पर बने भवनों पर15000 रुपये शास्ति अधिरोपित किया गया है।कुछ पार्षद व्यक्तिगत राजनीति की पूर्ति के उद्देश्य से जनता को गुमराह कर रहे हैं। यह आरोप है वरिष्ठ पार्षद निजामउद्दीन, राजेश निषाद, नीरज गुप्त, मीनू तिवारी एवं राजेश कुशवाहा का।
इन पार्षदों से संयुक्त बयान जारी कर गृहकर का विरोध करने वाले पार्षदों पर सस्ती लोकप्रियता का आरोप लगाया। कहा कि इसी प्रकार वर्ष 2011 में भी गृहकर को लेकर गलत तरीके से लड़ाई लड़ी गई, जिसका खामियाजा शहर की जनता को बड़े गृहकर, जलकर-जलमूल्य के बकाए पर एरियर के रूप में भुगतना पड़ रहा है। न्यायालय ने भी रिट याचिका संख्या 1129/2011 में कहा है कि पार्षद अपनी ड्यूटी नहीं निभा रहे हैं और अपनी जिम्मेदारी का पूर्ण रूप से निर्वाह नहीं कर रहे हैं। न्यायालय की नसीहत के बावजूद कुछ पार्षद जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। इन पार्षदों ने जनता से गृहकर शीघ्र जमा करने की अपील की।