हाईकोर्ट के तीन जजों की पूर्णपीठ ने कहा है कि लोक संपत्ति पर अवैध कब्जे के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील पोषणीय नहीं है। कब्जे के खिलाफ होने वाली कार्रवाई के खिलाफ याचिका दाखिल कर उसे चुनौती नहीं दी जा सकती है। कानून में किसी कार्रवाई के खिलाफ अपील का उपलब्ध नहीं होने पर हाईकोर्ट द्वारा अपील की अनुमति नहीं दी जा सकती है। पूर्णपीठ ने लोक संपत्ति अनाधिकृत कब्जा निवारण अधिनियम की धारा 5ए के तहत की गई कार्रवाई के विरुद्ध अपील दाखिल करने की अनुमति देने संबंधी संजय सिंह केस के फैसले को गलत करार दिया है। लोक संपत्ति पर अवैध कब्जे को हटाने का प्रावधान एक्ट धारा 5 ए में दिया गया है। इस कार्रवाई के खिलाफ अपील की कोई व्यवस्था एक्ट में नहीं है।
पूर्ण पीठ के इस निर्णय से लोक संपत्ति अधिकारियों को अवैध कब्जे के विरुद्ध सीधी कार्रवाई का अधिकार मिल गया है। पूर्ण पीठ के समक्ष यह विधि प्रश्न योगेश अग्रवाल और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान संदर्भित किया गया था। इस पर मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड, न्यायमूर्ति एमके गुप्ता और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पूर्ण पीठ ने दिया है। बता दें कि लोक संपत्ति अनाधिकृत कब्जा निवारण अधिनिमय की धारा 5ए में संपत्ति अधिकारी को सात दिन का नोटिस देकर कब्जा या अवैध निर्माण हटाने का अधिकार है।
अधिकारी ध्वस्तीकरण पर आने वाला खर्च कब्जाधारक से वसूल कर सकता है। अधिकारी जानवर बांधने या डिस्प्ले बोर्ड लगाने पर बिना नोटिस के भी कार्रवाई कर सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपील करने का अधिकार कानून के तहत ही प्राप्त किया जा सकता है। हाईकोर्ट अनुच्छेद 226 के तहत यह अधिकार सृजित नहीं कर सकता है।