रीवा रोड पर नैनी इलाके के भंडरा चौराहा के पास मंगलवार शाम तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार आठवीं के छात्र समेत दो लोगों को कुचल दिया। उन दोनों की वहीं मौत हो गई। इसके बाद भारी हंगामा हो गया। ट्रक लेकर ड्राइवर के भागने से लोगों में और भी ज्यादा नाराजगी थी। लोगों ने पुलिस को करीब घंटे भर तक शव नहीं उठाने दिया। इस वजह से रीवा रोड पर दोनों तरफ कई किलोमीटर तक भीषण जाम लग गया था।
मृतकों में घूरपुर में बड़ी अमिलिया गांव में रहने वाले कोलई का पुत्र विजयशंकर (24) और बिंदर का पुत्र करन (14) हैं। इनमें विजयशंकर बालू खनन घाट पर मजदूरी करता था जबकि करन आठवीं कक्षा का छात्र था। उन दोनों के पिता मजदूरी करते हैं। मंगलवार शाम विजयशंकर गेहूं चक्की में रखने के लिए चला तो अपने साथ करन को भी ले लिया। वे दोनों बाइक पर नैनी में मामा-भांजा स्थित चक्की गए। वहां गेहूं रखकर लौट रहे थे तभी भंडारा चौराहे के पास विजयशंकर ने सामने से ट्रक आते देखा। ट्रक से टक्कर के खतरे से वह घबराया तो बाइक पलट गई। वे दोनों उठ पाते इससे पहले ही ट्रक ने उन्हें रौंद दिया। दोनों की वहीं मौत हो गई जबकि ड्राइवर ट्रक लेकर तेज रफ्तार में भाग गया।
वहां भीड़ लग गई। खबर पाकर कुछ देर में उन दोनों के परिवार के लोग आ गए। उनके विलाप और चीख-पुकार से लोग गमगीन हो गए। ग्रामीणों की भीड़ जुटी तो पुलिस को शव नही उठाने दिए गए। जिला पंचायत सदस्य चाका सुनील पटेल और बसपा नेता अशोक गौतम भी पहुंच गए। अशोक के बारे में बताया गया कि वह विजय के मामा हैं। हंगामा होने की जानकारी पाकर एसडीएम करछना और सीओ भी तीन थानों की पुलिस फोर्स के साथ आ गए। गमगीन और गुस्साए लोगों ने पुलिस के खिलाफ भी नारे लगाए जबकि पुलिस ने कहा कि इसमें तो पूरी गलती ट्रक ड्राइवर की है। करीब घंटे भर तक समझाने और मनाने के बाद पुलिस दोनों शवों को उठा सकी। करीब नौ बजे तक रीवा रोड पर दोनों तरफ वाहनों की कतार लगी रही।
इस अनहोनी में दो परिवारों को गहरा आघात पहुंचा है। विजयशंकर की मां कुंती और करन की मां गुड्डी विलाप करती रहीं। मगर सबसे ज्यादा दुखद यह कि विजयशंकर अपने पीछे तीन माह की गर्भवती पत्नी सुशीला को छोड़ गिया है। साल भर पहले उसका ब्याह बसहरा गांव की सुशीला के साथ किया गया था। विजय की मौत से माता-पिता को भारी दुख पहुंचा तो सुशीला की जिंदगी में अंधेरा ही छा गया है। विजय दो भाइयों में छोटा था। उसके बड़े भाई की कुछ समय पहले बीमारी की वजह से मौत के बाद परिवार का जिम्मा विजय पर ही आ गया था। अब परिवार बेसहारा हो गया है। उधर, करन अपने परिवार का इकलौता पुत्र था।