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गंगा और मेले की बदहाली पर घिरा प्रशासन

Tue, 29 Dec 2015 11:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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मेला बदहाल है और गंगा प्रदूषण की हालत भी तेजी से बिगड़ रही है। प्रशासन चौतरफा घिरा हुआ है। मंगलवार को गंगाजल में कालापन और बढ़ गया। साथ ही जल का रंग लाल बना हुआ है। सोमवार को मुख्य सचिव आलोक रंजन ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये इस बारे में कमिश्नर से पूछताछ की थी, सो मंगलवार को कमिश्नर राजन शुक्ला ने अफसरों को तलब कर लिया और शाम को आपात बैठक बुलाकर प्रदूषण के मुद्दे पर सुधार के लिए दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कानपुर के डीएम से भी फोन पर बात की और टेनरियों को बंद कराने के निर्देश दिए। कमिश्नर मेला में चल रहे कार्यों की प्रगति से भी नाखुश नजर आए और सभी काम 31 दिसंबर तक पूरा करने को कहा।
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गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की ओर से बिना टैप 23 नालों के गंद पानी के शोधन का काम अब तक शुरू नहीं किया जा सका है और नालों का पानी सीधे गंगा में गिर रहा है। कमिश्नर ने गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और शोधन का काम तत्काल शुरू करने का निर्देश दिया। कमिश्नर को यह भी शिकायत मिली कि नारौरा से चार हजार क्यूसेक जल छोड़ा जा रहा है लेकिन बीच में नहरों में जल डायवर्ट हो जाने के कारण इलाहाबाद तक ढाई से तीन हजार क्यूसेक जल पहुंच रहा है। कमिश्नर ने सिंचाई विभाग के अफसरों से कहा कि जल स्तर की नियमित मॉनीटरिंग करें और सुनिश्चित करें कि इलाहाबाद तक पूरा चार हजार क्यूसेक जल पहुंचे।

 जल नहरों में डायवर्ट नहीं होना चाहिए। इस बीच कमिश्नर ने कानपुर के डीएम कौशल राज शर्मा से फोन पर बात की और उन्हें निर्देश दिए कि जो टेनरियां बना शोधन के गंदा पानी गंगा में छोड़ रही हैं, उन्हें तत्काल बंद करा दिया जाए। कमिश्नर ने मेले की बदहाली पर भी नाराजगी जाहिर की। मंगलवार सुबह मेला क्षेत्र में पहुंचे और अफसरों से कहा कि पांटून पुलों का काम समय से पूरा करें। पुलों पर रेलिंग न होने के कारण उन्होंने दुर्घटना की आशंका भी जताई। मुख्य मार्गों पर अस्त-व्यस्त पड़ी चकर्ड प्लेटों को देख कमिश्नर भड़क गए और अफसरोें से बोले कि बार-बार मामूली बातों के लिए टोकना पड़ता है। अफसर उन्हें कार्रवाई के लिए मजबूर न करें। 31 दिसंबर तक काम पूरा करने की समय सीमा निर्धारित की गई, तय समय सीमा में काम पूरा करें।
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 गंगा प्रदूषण के मसले पर दंडी संन्यासियों के साथ तीर्थ पुरोहितों ने भी आंदोलन का एलान किया है। उन्होंने 30 दिसंबर को संगम तट पर सांकेतिक उपवास करने का निर्णय लिया है। दंडी संन्यासियों का भी मेले में आगमन शुरू हो गया है। उन्होंने भी पहली जनवरी से आंदोलन करने की घोषणा की है।

स्वच्छ वसुंधरा सोसाइटी ने गंगा प्रदूषण के मुद्दे पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। सोसाइटी के सचिव विवेक अग्रवाल का कहना है कि वह और सोसाइटी के सदस्य मंगलवार को संगम पर पहुंचे। वहां गंगा जल का रंग लाल नजर आ रहा था। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की यह रिपोर्ट कि गंगा में प्रदूषण नहीं है, सरासर गलत प्रतीत होती है। उन्होंने प्रदूषण की जांच आईआईटी कानपुर या एमएनएनआईटी इलाहाबाद से कराए जाने की मांग की है।
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