जैसी आशंका थी, वही हुआ। माघ मेले में खाक चौक की जमीन के लिए शनिवार को बवाल हो गया और प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में एक संत ने आत्मदाह करने की कोशिश की। माधवदास के इलाहाबाद छोड़ते ही प्रशासनिक अफसरों ने भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी। आपाधापी में खाक चौक की जमीन नपवाई गई और माधवदास के हिस्से की जमीन पर उनका सामान लाकर रख दिया गया, जिसके विरोध में माधवदास गुट के एक संत ने खुद पर मिट्टी का तेल छिड़क लिया और चिता पर बैठ गया। पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ी लेकिन विरोध नहीं थमा। मूर्ति स्थापना की बात कहकर माधवदास गुट के संतों ने एक तंबू नहीं उखाड़ने दिया। कई संत देर रात तक मौके पर डटे रहे। खाक चौक के संतों को 28 दिसंबर को औपचारिक रूप से भूमि आवंटित की जाएगी।
माधवदास के विरोधी गुट का नेतृत्व कर रहे खाक चौक व्यवस्था समिति के महामंत्री सतुआ बाबा शनिवार सुबह तमाम साधु-संतों के साथ मेला प्रशासन कार्यालय पहुंचे और माधवदास को मौके से हटाने की मांग को लेकर अफसरों का घेराव शुरू कर दिया। इस पर मेला प्रशासन के अफसर फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। इससे पहले माधवदास इलाहाबाद छोड़कर कानपुर के लिए रवाना हो चुके थे। आपाधापी में प्रशासन ने खाक चौक की जमीन नपवाई और माधवदास के लिए प्लॉट संख्या 74 एवं 75 चिह्नित करते हुए उनका सामान उठाकर उन दोनों प्लॉटों पर रखवा दिया। माधवदास गुट के साधु-संतों ने इसका विरोध किया। संत राम किशोर दास ने कार्रवाई के विरोध में खुद पर मिट्टी का तेल छिड़क लिया और चिता पर बैठकर आत्मदाह करने की कोशिश की। पुलिस ने लाठियां पटककर कई साधु-संतों को वहां से खदेड़ दिया और राम किशोर को भी हटा दिया। इसके बावजूद माधवदास गुट के कई लोग मौके पर डटे रहे।
उनका कहना था कि वहां भगवान की प्रतिमा स्थापित कर दी गई है। वहां से न तो प्रतिमा हटेगी और न ही संत। वे दूसरी जगह नहीं जाएंगे।बवाल बढ़ने लगा तो अफसर पीछे हट गए और वह तंबू नहीं हटाया, जहां प्रतिमा की स्थापना की गई थी। संत भी वहां डटे रहे। प्रभारी अधिकारी माघ मेला हरिओम शर्मा का कहना है कि प्रशासन को नियमों के अनुसार मेला कराना है। खाक चौक के आपसी विवाद में प्रशासन का कोई हस्तक्षेप नहीं है। खाक चौक की जमीन चिह्नित कर ली गई है। माधवदास का सामान उनके हिस्से की जमीन पर पहुंचा दिया गया है और 28 दिसंबर को औपचारिक रूप से भूमि आवंटन कर दिया जाएगा। मौके पर फोर्स तैनात कर दी गई है। उधर, माधवदास का आरोप है कि प्रशासन ने लाखों का सामान उठाकर फेंक दिया। सामान कहां गया, उन्हें नहीं मालूम। सामान में 50 कुंतल राशन भी था। उन्हें महावीर चौराहे पर जमीन मिलती थी, वहीं जमीन लेंगे। प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ न्यायालय की शरण में जाएंगे।