पुलिस थानों में तैनात थानाध्यक्षों, प्रभारियों का जल्दी-जल्दी तबादला करने को हाईकोर्ट ने अनुचित करार दिया है। कहा है कि यदि तबादला बिना पुलिस स्थापना बोर्ड की मंजूरी लिए किया जाता है तो यह गलत है। जिले के प्रभारी पुलिस अधिकारी को एसओ या इंस्पेक्टर का तबादला समय पूर्व (दो वर्ष) से पहले करने के लिए उसका कारण स्पष्ट करते हुए बोर्ड की मंजूरी लेना अनिवार्य है अन्यथा ऐसा तबादला गलत माना जाएगा। हमीरपुर जिले में तैनात पुलिस इंस्पेक्टर विष्णु कुमार मिश्र ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका पर न्यायमूर्ति बी अमित स्थालेकर ने सुनवाई की।
याची के वकील विजय गौतम का कहना था कि थाने पर तैनात किसी भी थानाध्यक्ष या इंस्पेक्टर का तबादला दो वर्ष के बाद ही किया जा सकता है। सुप्रीमकोर्ट ने प्रकाश सिंह केस में यह व्यवस्था दी है, जिसका पालन करना अनिवार्य है। प्रदेश सरकार ने भी दो सितंबर 2010 में शासनादेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि बिना पुलिस स्थापना बोर्ड की मंजूरी के थानाध्यक्ष का तबादला दो वर्ष से पहले नहीं किया जा सकता है। शासनादेश में यह भी व्यवस्था है कि यदि दो वर्ष से पूर्व तबादला करना आवश्यक है तो इसके लिए कारण स्पष्ट करते हुए स्थापना बोर्ड की मंजूरी लेनी होगी।
याची इंस्पेक्टर विष्णु को हमीरपुर के जेवर थाने में तैनात किया गया था। तीन महीने बाद ही उसका तबादला एसपी हमीरपुर ने उसका तबादला माफिया सेल में कर दिया। ऐसा करने से पूर्व एसपी ने स्थापना बोर्ड की अनुमति नहीं ली और न ही कोई कारण बताया है। कोर्ट ने एसपी हमीरपुर के तबादला आदेश को गलत मानते हुए उसे रद्द कर दिया है।