इलाहाबाद विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा मिले 10 साल हो गए हैं, लेकिन विद्यार्थी अब भी क्लास रूम के लिए जूझ रहे हैं। नया सत्र शुरू होने के साथ ही इसके लिए रार शुरू हो गई है, लेकिन कक्षाओं का इंतजाम नहीं हो पाया है। विश्वविद्यालय की सुस्त कार्यशैली और विवादों की वजह से नए भवन का काम अभी खत्म नहीं हो पाया है। समस्या को देखते हुए उसके 10 कमरों में कक्षाएं शुरू करने की योजना बनाई गई, लेकिन अभी इसमें भी अवरोध बना हुआ है।
ग्लोबलाइजेशन, समाजशास्त्र समेत कई विषयों की पढ़ाई उधार के विभागों में हो रही है। क्लास रूम के लिए पिछले साल एक विभागाध्यक्ष ने प्रवेश लेने से मना कर दिया तो शिक्षकों को धरना भी देना पड़ा, लेकिन समाधान नहीं हो पाया। नया सत्र शुरू होने के बाद इस साल फिर क्लास रूम के लिए धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया है। संबंधित विषयों की कक्षाएं बुरी तरह से प्रभावित हैं, लेकिन हाल फिलहाल समस्या दूर होती नहीं दिख रही। खास यह कि निर्णय न लेने की वजह से समस्या और बढ़ गई है। केंद्रीय पुस्तकालय के सामने बन रहे नए भवन में कई कमरे तैयार हो गए हैं। कुल अभियंता नवीन सिंह का कहना है कि उनमें फर्नीचर आदि लग गए हैं। उनमें कक्षाएं शुरू की जा सकती हैं। इसके विपरीत विश्वविद्यालय प्रशासन अभी इसके लिए तैयार नहीं हो पा रहा। कुछ शिक्षक तो यह भी कहने लगे हैं कि नए भवन में कक्षाएं शुरू की गईं तो उन्हें तथा विद्यार्थियों को सड़क पार करके बार-बार आना-जाना पड़ेगा। इससे परेशानी बढ़ने के साथ टाइम टेबल तैयार करना भी मुश्किल होगा। ऐसे में क्लास रूम को लेकर समस्या बने रहने की आशंका है।