दरियाबाद में रविवार को अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ा। तमाम रास्ते इमामबाड़ा जद्दनमीर साहब और कब्रिस्तान की ओर मुड़े। पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों की करबला में शहादत की याद में अकीदत और एहतराम के साथ बहत्तर ताबूत का जुलूस निकाला गया तो पूरा माहौल गमगीन हो उठा। अंजुमन खुद्दामे मोजिजनुमा रजिस्टर्ड की ओर से इमामबाड़ा जद्दनमीर साहब से एक-एक कर बहत्तर ताबूत निकाले गए। ऐसे में इमामबाड़े से लेकर कब्रिस्तान तक काले लिबास में महिलाओं, पुरुषों, बच्चों, बूढ़ों की मौजूदगी से गम की स्याह चादर तनी रही।
सुबह से ही शुरू सिलसिला शाम तक जारी रहा। एक-एक शहीद की याद में शबीहे ताबूत निकले और जौनपुर से आए मौलाना सैयद इंतेजार आब्दी ने मखसूस अंदाज में उनकी जांबाजी का बयान किया, जिससे अकीदतमंदों की आंखें अश्कबार हुईं। अकीदतमंदों ने ताबूतों पर चादर और फूल-मालाएं चढ़ाकर मन्नत और दुआएं मांगी। ताबूतों का बोसा लेने के लिए लोगों में होड़ मची रही।
शुरुआत में मंजर अलहिन्दी, सरदार रियाज मिर्जा और शुजा अब्बास ने सोजख्वानी की।
एक साथ और एक ही जगह पर नसब बहत्तर अलम का मंजर अद्भुत रहा। कई खास ताबूतों के जुलूस लेकर मातमी अंजुमनें सैयदवाड़ा, पीपल चौराहा होकर कब्रिस्तान पहुंची। दरगाह इमाम हुसैन के पश्चिम ओर बने गहरे गड्ढ़े में ताबूतों के फूलों को दफन करने की रस्म अदा की गई। जरखेब नजीब ने हजारों सोगवारों को खिताब किया। बारह वर्षीय अली मोहम्मद और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर साहबे आलम ने दर्द भरे नौहों से हाजरीन की आंखें नम कर दीं। सिलसिलेवार और सलीके से पूरे कार्यक्रम का संचालन नजीब इलाहाबादी ने किया।
अंजुमन खुद्दामे मोजिजनुमा रजिस्टर्ड के अध्यक्ष सैयद रजा हसनैन, उपाध्यक्ष सैयद अजादार हुसैन, संयोजक जाफर अब्बास, नजीब रजा, बशारत हुसैन आदि के अतिरिक्त रंजोगम में डूबे हजरत इमाम हुसैन के हजारों शैदाइयों की मौजूदगी खास रही। कार्यक्रम में बड़ा ताजिया, बुड्ढा ताजिया, ऐतिहासिक मुहर्रम कमेटी, झूला कमेटी, तहफ्फुजे अजा कमेटी आदि के पदाधिकारियों संग नागरिक सुरक्षा कोर के सदस्यों ने भी मौजूदगी दर्ज कराई।