मतपत्र पर अगर किसी तरह का कोई लेख या निशान लगा मिलता है, जिससे मतदाता की पहचान हो सकती है तो मतपत्र रद्द कर दिया जाएगा। मतगणना के दौरान किस तरह की एहतियात बरतनी है और किस आधार पर मतपत्र निरस्त किए जा सकते हैं, इस बाबत उप जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) अटल कुमार राय की ओर से दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। ग्राम पंचायत चुनाव की मतगणना 13 दिसंबर को होनी है।
मतपत्र रद्द करने के कई और कारण भी दिए गए हैं, जैसे मतपत्र के सामने की ओर कोई भी निशान न लगा हो, निशान किसी दूसरे तरह के उपकरण से लगाया गया हो, जब निशान पृष्ठ भाग के खाली स्थान या पूरी तरह से उपेक्षित स्थान पर लगा हो, जब दो या अधिक प्रत्याशियों के चुनाव चिह्न के सामने निशान लगे हों, जब मतपत्र पर कोई लेख या जब मतपत्र इतना कटा-फटा हो कि इसकी पहचान न की जा सके, जब मतपत्र प्रमाणित न हो या नकली हो या निशान चुनाव चिह्न को विभाजित करने वाली रेखाओं के मध्यम अंकित किया गया हो।
गाइडलाइन में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि मतगणना केंद्र के परिसर की 200 मीटर की परिधि में केवल ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों एवं अफसरों को ही प्रवेश दिया जाएगा। मतगणना पर्यवेक्षक को किसी भी दशा में उस विकास खंड में मतगणना के लिए नियुक्त नहीं किया जाएगा जहां वह कार्यरत है। हर मतगणना कक्ष में पूरी मतगणना प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी।
साथ ही जिस ग्राम पंचायत सदस्य ने नामांकन से लेकर मतदान तक का कार्य, मतगणना के लिए उस न्याय पंचायतमें उसकी ड्यूटी बिल्कुल न लगाई जाए। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार विशिष्टि, अति विशिष्ट व्यक्त्यिों जैसे सांसद, विधायक, एमएलसी, मंत्री एवं सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों को मतगणना अभिकर्ता नियुक्त न करें। मतगणना कक्ष में उम्मीदवार, निर्वाचन अभिकर्ता या उसका गणना अभिकर्ता तीनों में से कोई एक व्यक्ति ही एक समय में उपस्थित रह सकता है।
मतपेटिकाएं बूथवार निकाली जाएं और वोटों की गिनती भी बूथवार हो। एक बूथ की मतपेटिकाएं एक साथ खोली जाएं और 50-50 मतपत्रों की गड्डी बनाकर रखी जाएं। साथ ही मतपत्र लेखा से मिलान किया जाए। संदिग्ध मतपत्रों का अलग बंडल बनाया जाए, उस पर पर्ची लगाई जाए और पर्ची पर ‘संदिग्ध मतपत्र’ लिखा हो। संदिग्ध मतपत्रों की कुल संख्या भी लिखी हो। संबंधित बीडीओ/चुनाव अधिकारी की ओर से परिणाम की ऑनलाइन फीडिंग तत्काल कराई जाए।