इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद संग्रहालय में माह भर से चल रहे ‘कला अभिरुचि पाठ्यक्रम’ का समापन शुक्रवार को हुआ। सुप्रसिद्ध नृत्यांगना पद्मश्री डॉ. गीता चंद्रन ने भारतीय नृत्य कला की विविध शैलियों की व्याख्या की। उन्होंने ‘शिव नटराज’ और ‘मीरा के पदमन चाकर राखो’ की प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कहा कि तनावयुक्त जीवन से मुक्ति का एकमात्र माध्यम कला ही है। अपने स्वभाव को ओजस्वी बनाकर समाज में अपने प्रभाव की स्थापना की जा सकती है। कला के क्षेत्र में यह प्रभाव सार्वदेशिक हो सकता है। जिसकी अपेक्षा आज के युवाओं से है। कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ. अनामिका ने भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों और उसके मूल्यों को परिभाषित किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. ओंकार वानखेड़े, संचालन एवं आभार ज्ञापन डॉ. राजेश कुमार मिश्रा और संयोजन डॉ. संजू मिश्र, डॉ. सुशील, स्वप्निल कुमार शर्मा ने किया।