इलाहाबाद। चांद रात को बाजारों में जबर्दस्त भीड़ रही। वैसे तो दोपहर बाद से ही बाजारों की रौनक और रंगत बदलने लगी थी लेकिन चांद रात के साथ इसमें काफी इजाफा हुआ। ईद के मद्देनजर की जाने वाली तैयारियों में अब तक जो चीजें बाकी रह गई थीं, चांद रात को खरीदी गई। खाने-पीने की चीजों से लेकर कपड़े तक की खरीदारी बस चांद रात में ही मुकम्मल की गई।
ईद की खुशियां बटोरने के लिए हर कोई जुटा। दबंग फेम कुर्ते, रामपुरी टोपियां, कन्नौज का इत्र तो खास रहा ही, पर्दे, डोर मैट, सोफे के कुशन, चद्दरें, प्यालियां भी बदली गईं। शानदार सूट के साथ मैचिंग चूड़ी, बिंदी, पर्स, नई पायल, बिछिया, रेडीमेड कपड़े खरीदे गए तो कुर्ते-पायजामे, जूते की खरीद के लिए भी लोग बेताब रहे। सजावटी सामानों की खरीद के लिए भी लोग दुकानों पर अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
ईद के मौके पर खास तौर पर सेवइयों का बाजार परवान पर रहा। खास किमामी सेवइयों के साथ मेवे भी खरीदे गए। अपनी पसंद के मुताबिक किमामी सेवईं सहित दूधवाली, कच्ची, सूतफेनी, बनारसी खरीदी गईं। इसी तरह चिकन, मटन की दुकानों पर भी भीड़ रही। नाई की दुकानों पर बाल कटवाने के लिए तो लोगों ने काफी देर तक अपनी बारी का इंतजार किया।
ईद के दिन सुन्नत मानी जाने वाली बातों पर अमल करना चाहिए। इसके तहत मिस्वाक करना, गुस्ल करना, नमाज अदा करना, अच्छे कपड़े पहनना, खुशबू लगाना और ईदगाह या मस्जिद जाने से पहले फितरा अदा करना शामिल है। इसी तरह ईद की नमाज पढ़ने के लिए जिस रास्ते से ईदगाह या मस्जिद तक जाएं, वापसी में उस रास्ते से इतर दूसरे रास्ते से लौटें ताकि रास्ते में जो भी जरूरतमंद मिलें, उनकी मदद हो सके।
0 मुफ्ती शफीक अहमद शरीफी, शहर काजी