सेंट्रल गवर्नमेट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) के कर्मचारियों को हड़ताल पर रहने की जो सजा दी गई थी, उसमें कर्मचारियों को बड़ी राहत प्रदान की गई है। कर्मचारियों को केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के एक पुराने आदेश का हवाला देकर राहत दी गई है। उनके खिलाफ की गई डायज नॉन की कार्रवाई अब एसीपी या एमएसीपी के मामले में प्रभावी नहीं होगी। इससे न सिर्फ मौजूदा कर्मचारियों, बल्कि दावा करने पर उन पेंशनरों को भी फायदा मिल सकेगा, जिन्हें रिटायरमेंट से पहले ऐसी कार्रवाई का सामना करना पड़ा था।
कर्मचारी को जितने दिन के लिए डॉयज नॉन किया जाता है, उतने दिन उसके सेवाकाल से काट लिए जाते हैं। ऐसे में एक निर्धारित समय के बाद कर्मचारी को जो लाभ मिलना है, वह नहीं मिल पाता है। उदाहरण के तौर पर किसी कर्मचारी को 15 दिन के लिए डायज नॉन किया गया तो उसे निर्धारित समय सीमा बीतने के 15 दिन बाद ही लाभ मिल सकेगा। सीजीएचएस कर्मचारियों के साथ भी ऐसा ही हुआ। हड़ताल पर जाने के कारण उन्हें कुछ दिनों के लिए डायज नॉन कर दिया गया और इसकी वजह से उन्हें एसीपी या एमएसीपी का लाभ निर्धारित समय पर नहीं मिल सका और नुकसान उठाना पड़ा।
ऐसे कर्मचारियों को राहत प्रदान की गई है। अपने रिटायरमेंट के दिन यानी 30 जून को सीजीएचएस इलाहाबाद की अपर निदेशक डॉ. कुमुस लता ने डीओपीटी की ओर से 19 मई 2009 को जारी एक आदेश का हवाला देते हुए 11 कर्मचारियों के लिए ऑफिस ऑडर जारी किया कि उनके खिलाफ हुई डायज नॉन की कार्रवाई एसीपी या एमएसीपी पर प्रभावी नहीं होगी और इस मामले में डायज नॉन को ‘नो वर्क नो पे’ के समान माना जाएगा। जिन कर्मचारियों को राहत मिली, उनमें एसपी राम, एससी आर्या, वाईएन तिवारी, राम देव, नमिता जना, संजय कुमार सिन्हा, राकेश कुमार, अंजनि कुमार, विवेक कौशल, नीलिमा लाल एवं दया सिंह शामिल हैं।
सीजीएचएस से रिटायर एवं सीजीएचएस कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष वीएन सिंह का कहना है कि जो कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं और हड़ताल के कारण उन्हें डायज नॉन की कार्रवाई झेलनी पड़ी थी, अब वे भी इस आदेश के तहत राहत के लिए दावा कर सकते हैं। इससे एसीपी या एमएसीपी में हुए नुकसान का एरियर तो मिलेगा ही, इसी वजह से पेंशन, ग्रेच्युटी आदि में जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई भी हो सकेगी। उन्हें और उनके तमाम साथियों को भी नौकरी के दौरान हड़ताल पर रहने के लिए ऐसी कार्रवाई झेलनी पड़ी और रिटायरमेंट के समय नुकसान उठाना पड़ा।