नैनी(ब्यूरो)। 31वीं इंदिरा मैराथन दौड़ में भाग लेने वाले धावकों का अरैल क्षेत्र पहुंचते ही सच्चा आश्रम के पुजारियों ने फूलों की बौछार के साथ जोरदार स्वागत किया। आश्रम के पुजारियों ने तालियां बजाकर उनकी हौसला अफ़जाई किया। बृृहस्पतिवार की सुबह इंदिरा मैराथन की रोमांचक दौड़ में धावक के कदम जैसे ही नैनी के अरैल क्षेत्र में पहुंचे वैसे अरैल स्थित सच्चा आश्रम के पुरोहितों और वैदिक शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र पहले से ही स्वागत के लिये खड़े थे।
सच्चा आश्रम के पास बांध रोड पर धावकों के लिये कैंप के जय प्रकाश मिश्रा की ओर से कैंप भी लगाया गया था। जहां धावकों के पहुंचते ही उनका फूल मालाओं से जोर दार स्वागत किया गया। इस दौरान धावकों का तालियों से हौसला बढ़ाया।
इंदिरा मैराथन दौड़ शुरू होने के बाद नये पुल लेप्रोसी चौराहे पर घंटों जाम लगा रहा। जाम लगने के कारण आने जाने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ट्रैफिक और स्थानीय पुलिस ने जाम को हटाने के लिये काफी मशक्कत किया। लेकिन सुबह सात बजे से करीब ग्यारह बजे तक भीषण जाम लगा रहा। जाम के दौरान कुछ लोगों के बीच कहासुनी भी हुई। लेकिन मामले को संभाल लिया गया। लेप्रोसी चौराहे पर लगे जाम के कारण परा मिर्जापुर मार्ग जाम रहा। नये पुल से लेकर डांडी और जेल रोड तक जाम की स्थिति बनी रही।
मैराथन दौड़ में नगर निगम की लापरवाही साफ दिख गई। धावकों की दौड़ में पशु भी शामिल रहे। धावकों के बीच में कहीं गाय तो कहीं सुअर आने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। कहीं- कहीं पर जानवर उनके बीच आ जाने से उनकी गति धीमी हो जा रही थी। कई बार तो धावकों को जानवरों के कारण रुकना भी पड़ रहा था। अरैल बांध रोड पर एक धावक के सामने गाय आने के कारण वह गिर पड़ा। जिसे लोगों ने उठाया।
इंदिरा मैराथन की दौड़ में शामिल होने आये उत्तराखण्ड के भानु प्रताप सिंह की देहरादून में आर्मी में तैनाती है। बृहस्पतिवार को वह दौड़ में शामिल तो हुए लेकिन हार मान ली। अरैल घाट के पास वह पहुंचा तो उसके पैर में खिंचाव शुरू हो गया। लेकिन उसने हार नहीं मानी। वह अपनी द़ौड़ जारी रखे रहा। लेकिन तीस किलोमीटर की दौड़ पूरी करने के बाद अचानक उनके दोनों पैरों में खिंचाव से साथ दर्द शुरू हो गया। जिसके बाद वह रुका और पैैर पकड़कर बैठ गया। फिर वह घंटों नहीं उठा। उसके साथ रहे लोगों ने उसे उठाया और उसे स्टेडियम भेज दिया।