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चाइनीज खत्म, बनने लगा धागे वाला मंझा

Wed, 18 Nov 2015 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। खतरनाक चाइनीज मंझे से कई मौतें और बड़ी संख्या में बच्चों, महिलाओं एवं पुरुषों के घायल होेने के बाद ‘अमर उजाला’ की ओर से इसके खिलाफ शुरू की गई मुहिम का असर दिखने लगा है। चाइनीज मंझे के कारण पिछले चार-पांच वर्ष से बंद धागे से मंझा बनाने का काम फिर से आबाद हो गया है। ‘अमर उजाला’ में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद बाजार से चाइनीज मंझा गायब हुआ तो इन कारीगरों को आर्डर भी मिलने लगे हैं। पतंग का सीजन शुरू होने के कारण पिछले 20 दिनों में कारीगरों को काफी आर्डर मिल चुके हैं सो रामबाग, अकबरपुर, जीरो रोड पर धागे और चावल की माड़ से मंझा बनाने वाले कारीगर बांस-बल्ली लगाकर काम में जुट गए हैं। इन कारीगरों ने भी ‘अमर उजाला’ के अभियान पर शुक्रिया अदा किया है।
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तार और खतरनाक रसायनों से तैयार होने वाला चाइनीज मंझा शहर में कई लोगों की जान ले चुका है। चाइनीज मंझा इतना मजबूत होती है कि यह खींचने पर भी नहीं टूटता। इसके इस्तेमाल से बच्चों की अंगुलियां अक्सर कट जाती हैं। कई लोगों की जान लेने के साथ खतरनाक चाइनीज मंझा बड़ी संख्या में लोगों का गला, चेहरा, नाक, कान भी रेत चुका है। इलाहाबाद में चाइनीज मंझा पुणे और बंगलुरु से वाराणसी होकर पहुंचता है। ‘अमर उजाला’ ने अक्तूबर में चाइनीज मंझे के खिलाफ जबरदस्त अभियान चलाया। पखवाड़े भर लगातार खबरें प्रकाशित होना शुरू र्हुईं तो बाजार से चाइनीज मंझा गायब हो गया। खबरें प्रकाशित होने के बाद पुलिस और प्रशासन ने भी दुकानों पर सख्ती की। नतीजा हुआ कि बाजार से काफी हद तक चाइनीज मंझा गायब हो गया। हालांकि चौक, करेली, मीरापुर में कुछ दुकानदार चोरी-छिपे चाइनीज मंझा बेच रहे हैं।

 चाइनीज मंझा आने के बाद पिछले 35-40 साल से धागे से मंझा बनाने वालों का काम करीब चार साल से बंद था। इन कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हुआ तो परिवार का गुजारा चलाने के लिए कोई रिक्शा, ठेला चलाने लगा तो कुछ कारीगरियों ने पान-चाय की दुकान खोल ली। ‘अमर उजाला’ के मुहिम के बाद बाजार से चाइनीज मंझा गायब होने और पतंग का सीजन शुरू होने पर धागे वाले मंझे की डिमांड बढ़ गई। इसके बाद पतंग-मंझे के कारोबारियों को भी उन कारीगरों की याद आ गई सो पिछले 15-20 दिनों में इन कारीगरों के पास मंझे के आर्डर की भरमार हो गई। जीरो रोड पर मोती पार्क के पास मंझा बनाने वाले अजीत, रामबाग में ईदगाह के त्रिलोकी नाथ तथा अकबरपुर में मनोहर दास बगिया के जिशान एवं रमजान अली के पास धागे वाले मंझे के आर्डर की भरमार हो गई है। उन्होंने चाइनीज मंझे के खिलाफ मुहिम का शुक्रिया अदा करते कहा कि अमर उजाला ने उनका धंधा फिर से जीवित कर दिया।
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 चाइनीज मंझे के साथ शहर के लोग चाइना के हर उत्पाद पर प्रतिबंध की मांग करने लगे हैं। इसके साथ पॉलीथिन पर भी सख्ती से रोक लगाने की मांग की जा रही है। समाजसेवी मोहम्मद याशिर एवं अटाला व्यापार मंडल के अध्यक्ष फय्याज अहमद कुरैशी का कहना है कि जो लोग चोरी-छिपे चाइनीज मंझा बेच रहे हैं, पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाले। उनका कहना है कि लोगों को चाइनीज उत्पादों का पूरी तरह बहिष्कार करना चाहिए। ग्राहक और दुकान पॉलीथिन का प्रयोग भी बंद करें, ताकि प्रदूषण की समस्या खत्म हो। मिट्टी और दुधारु मवेशियों को बचाया जा सके।
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