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वेद विद्यालय के लिए दान किया अपना आवास

Wed, 18 Nov 2015 12:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने केलिए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक अशोक  सिंहल देश भर के सभी प्रमुख शहरों में वेद विद्यालय की स्थापना करवाना चाह रहे थे। उन्हें इस प्रयास में काफी हद तक सफलता भी मिली। उनके प्रयास से ही 22 वेद विद्यालय खुल गए। इतना ही नहीं, इलाहाबाद के हाशिमपुर रोड स्थित अपने पैतृक आवास ‘महावीर भवन’ का आधा हिस्सा उन्होंने वेद विद्यालय के लिए दान कर दिया। इसमें काफी संख्या में छात्र वेदों का नियमित अध्ययन करते हैं।
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अशोक सिंहल ने जिन 22 वेद विद्यालयों की स्थापना कराई, उनमें से दो वेद विद्यालय इलाहाबाद में ही हैं। अक्तूबर माह में ही विहिप के केसर भवन स्थित कार्यालय में दूसरा वेद विद्यालय खुला। इसके अलावा उन्होंने वाराणसी, हरिद्वार, कानपुर, लखनऊ, असम और जम्मू कश्मीर में भी वेद विद्यालय खुलवाने में अपनी अहम भूमिका निभाई। ‘महावीर भवन’ स्थित वेद विद्यालय की स्थापना के लिए अशोक सिंहल ने अपने आवास की ऊपरी मंजिल दान कर दी। साथ ही विद्यालय के संचालन के लिए बजट भी उपलब्ध कराया।

अपने आवास में अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ की भी स्थापना की, जहां समय-समय पर गोष्ठियां एवं विहिप से जुड़े अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अशोक सिंहल के करीबियों का कहना है कि उनका गौ प्रेम भी अटूट था। देश भर में उन्होंने कई गौ शालाएं बनवाईं। समय-समय पर गौ शालाओं केनिरीक्षण के लिए भी जाते थे। अशोक सिंहल के निर्देश पर ही विहिप के महिला संगठन दुर्गा वाहिनी के जरिये मलिन बस्तियों में रहने वाले बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए समय-समय पर बालवाड़ी का आयोजन कराया जाता है। इलाहाबाद में केसर भवन स्थित विहिप कार्यालय प्रमुख सुनील कुमार का कहना है कि महाराष्ट्र के नागपुर में जो गौ शाला उन्होंने बनवाई थी वहां गौ मूत्र से दवाएं भी बनाई जाती हैं। इसके सेवन से सैकड़ों लोगों को स्वास्थ्य लाभ भी मिला।
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 विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल भले ही इस दुनिया में नहीं लेकिन इलाहाबाद की सांसों में वह हमेशा शामिल रहेंगे। अपने जीवन काल में तमाम महत्वपूर्ण निर्णय उन्होंने इलाहाबाद में ही लिए। इसमें मुख्य रूप से राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े तमाम निर्णय शामिल हैं। सिंहल की वजह से ही राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान इलाहाबाद बड़ा केंद्र बिंदु बनकर उभरा। तब सिंहल विहिप के महासचिव थे। इतना ही नहीं सूबे की तत्कालीन मुलायम सरकार की ओर से कारसेवकों के खिलाफ की गई कार्रवाई के दौरान सिंहल सिर पर ईंट लगने से घायल भी हो गए थे।

अशोक सिंहल ने इलाहाबाद में हाशिमपुर रोड स्थित ‘महावीर भवन ’ में अपना काफी जीवन गुजारा। देश आजाद होने से पहले बने अपने इस पैतृक मकान में ही सिंहल अपने करीबियों, विहिप नेताओं एवं मीडिया से मुखातिब हुआ करते थे। इलाहाबाद से उनकी रवानगी अंतिम इस बार शारदीय नवरात्र के दौरान हुई। उनका कितना ही बिजी शेड्यूल रहा हो लेकिन शारदीय नवरात्र की अष्टमी के दिन वह  ‘महावीर भवन ’  में ही आकर पूजन-अर्चन एवं हवन आदि किया करते थे। अबकी वह अष्टमी के दिन 20 अक्तूबर को इलाहाबाद में ही थे। हालांकि उनकी तबीयत कुछ खराब थी। सूचना पाकर उनके भतीजे रवि सिंहल इलाहाबाद आ गए। फेफड़ों में संक्रमण की वजह से तत्काल दिल्ली से एयर एंबुलेंस बुलाई गई और उन्हें गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया।

 विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल का एकेडमिक करियर भी काफी शानदार रहा। उनके पिता महावीर प्रसाद पेशे से इंजीनियर थे। शायद इसी वजह से अशोक सिंहल ने 1950 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से एमटेक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई-लिखाई में वह शुरू से ही मेधावी रहे। संघ से जुड़ने की कहानी भी उनकी बेहद दिलचस्प रही।
सात भाई और एक बहन के परिवार में अशोक सिंहल पांचवें नंबर के थे।  उनके करीबियों की मानें तो एमटेक करने के बाद उनकी अमेरिका जाने की प्लानिंग थी। अमेरिका जाने से पहले वह एक दिन वाराणसी केलहुरावीर स्थित संघ कार्यालय गए। वहां उनकी मुलाकात नाना जी देशमुख से हुई। वहां उन्होंने बताया कि वह अमेरिका जाना चाह रहे हैं। उनकी बात सुनकर नानाजी देशमुख ने कहा कि तुम भारत में ही क्यों नहीं रुक जाते। यहां रुककर भारतीय संस्कृति को बढ़ावा दो। उनकी बात सुनकर अशोक सिंहल संघ के कार्यालय में स्थित एक कक्ष में एकांत के लिए चले गए। वहां तीन चार घंटे गुजारने के बाद वह सीधे अपने पिता से मिले और पिता से अमेरिका नहीं जाने के लिए कह दिया। पिता ने भी सिंहल के  इस निर्णय पर किसी भी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं किया।
बाद में अशोक सिंहल संघ के प्रचारक बन गए। वह इमरजेंसी के दौरान गिरफ्तार भी हुए। 1983 में वह विहिप में शामिल हुए। इसके बाद वर्ष 1984 में राम जन्म भूमि आंदोलन की शुरुआत हुई तो उन्होंने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने कई यात्राएं भी निकालीं। इसमें राम जानकी रथ यात्रा प्रमुख रूप से शामिल है। वर्ष 2001 से 2013 तक वह विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। फिलहाल वह संरक्षक का दायित्व बखूबी निभा रहे थे।

हिंदू तीर्थ पर्यटन के रूप में भारद्वाज आश्रम को विकसित करना चाहते थे सिंहल
अपने अंतिम दिनों में विहिप नगर अध्यक्ष से भारद्वाज आश्रम की दुर्दशा पर की थी बातें
इलाहाबाद। विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक  अशोक सिंहल हाशिमपुर रोड स्थित अपने आवास से महज 200 मीटर की दूरी पर बने भारद्वाज पार्क को हिंदू तीर्थ पर्यटन के रूप में विकसित करना चाहते थे। उनकी इच्छा थी कि इलाहाबाद को लोग संगम के साथ भारद्वाज आश्रम के लिए भी जानें लेकिन जीते-जी उनका यह सपना पूरा न हो सका। भारद्वाज आश्रम के प्रति प्रशासनिक उपेक्षा से वह काफी आहत थे।

इस बार नवरात्र के दौरान जब वह इलाहाबाद आए तो बम्हरौली एयरपोर्ट पर विमान से उतरने के बाद वह विहिप नगर अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल के साथ हाशिमपुर रोड स्थित अपने आवास महावीर भवन की ओर रवाना हुए। उनके घर के पास ही भारद्वाज आश्रम है। आश्रम के सामने से निकलते हुए उन्होंने अपने मन की पीड़ा विहिप नगर अध्यक्ष से साझा की। नगर अध्यक्ष को भारद्वाज आश्रम का पूरा इतिहास भी उन्होंने बताया। उन्होंने कहा कि प्रयाग की दो आत्मा हैं। पहला संगम और दूसरा भारद्वाज आश्रम। कुंभ मेले की वजह से संगम तो विश्व विख्यात है लेकिन भारद्वाज आश्रम अब भी उपेक्षा का शिकार है। अगर भारद्वाज आश्रम हिंदू तीर्थ पर्यटन के रूप में विकसित किया जाए तो विश्व पटल में इलाहाबाद सबसे बड़े तीर्थ स्थान के रूप में उभरकर सामने आ सकता है। कहा कि इस बारे में पर्यटन मंत्री से बात करेंगे लेकिन उनकी यह अधूरी ख्वाहिश पूरी न हो सकी।
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