इलाहाबाद (ब्यूरो)। डाला छठ के तीसरे दिन मंगलवार को अस्ताचल गामी यानी डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया गया। नाक से माथे तक का मंगल सिंदूर लगाए दुल्हन जैसा शृंगार करके व्रती महिलाओं ने कमर भर पानी में खड़े होकर जब अर्घ्य दिया तो सिंदूरी आभा से उनके चेहरे दमक उठे। जब तक सूर्य अस्त नहीं हुआ तब तक तट पर घंटा घड़ियाल शंख ध्वनि के साथ भगवान सूर्य देव की जय के घोष से संगम, अरैल, दारागंज बलुआघाट आदि घाट गूंजते रहे।
डाला छठ के तीसरे दिन 36 घंटे का निर्जला व्रत श्रद्धापूर्वक रखा गया।
पूरा दिन तैयारी में बीता। शुद्धता का पूरा ध्यान रखा गया। कलात्मक तरीके से सजाए गए डाला में गन्ना, सिंघाड़ा, आंवला, अन्नास, कैथा, चकोतरा, नारियल, मीठा नीबू, नीबू, अनार, संतरा, अमरूद, केला, सेब, हरी हल्दी, हरी अदरक, इमली, अमरा, बेर, सुतनी, मूली, कदम का फूल, शकरकंद, करौंदा, अमरख, छोटी, बड़ी नारंगी, मूली, अरवी, बंडा, मीठी नीम मकोय आदि 52 प्रकार की सामग्री सजाईं गई।
डाला में कच्चे सूत की माला, करधनी आदि भी रखा गया। सजे सूप के अगले भाग में जलता हुआ मिट्टी का दिया रखा गया पीले कपड़े पहनकर महिलाओं घर से घाट तक का सफर तय किया। घाट पर बनी वेदी पर विधिविधान से पूजा और ‘अभी न डुबिहे भास्कर दीनानाथ करिहे घरवा उजार हो’ सूर्य देव से जल्दी न डूबने की प्रार्थना की गई। जैसे-जैसे सूर्य अस्त होने लगा अर्घ्य देकर परिवार एवं संतान के सुख सौभाग्य आयुष्य की मंगल कामना की गई।
जलता दीपक लेकर घर पहुंचीं
व्रती महिलाओं ने घाट पर पूजा अर्चना करने के बाद सूप में जलता दीपक रखकर घर पहुंचीं। पूरे रास्ते इस बात का ख्याल रखा गया कि दीपक की लौ मध्यम न हो। दीपक को पूजा घर में रखा गया। इसी दीपक को सूप में रखकर सुबह उगते सूर्य की आरती की जाएगी।
पुरुषों ने उठाया डाला
ईख, नारियल, पत्ते वाली हल्दी, मुसम्मी, शरीफा सहित कई तरह के फल गाजर, नींबू, कद्दू, मूली, अदरक, पुआ आदि से सजे डाला को घर से घाट तक लाने का काम पति और पुत्रों ने किया। सूर्य आराधना के गीत गाती व्रती महिलाओं ने पैरों में चप्पल नहीं पहनी थी।
जमकर हुई आतिशबाजी
संगम तट पर किलाघाट से लेकर संगमनोज तक मेले का माहौल रहा। पूर्वांचल छठ पूजा समिति की ओर से जमकर आतिशबाजी की गई। समिति के सदस्य अध्यक्ष अजय राय की अगुवाई में तट पर मुस्तैद रहे। समिति की ओर से प्रकाश व्यवस्था कराई गई थी। भूले भटके शिविर लगाया गया था जिसमें बीस बच्चों को उनके परिजनों से मिलाया गया।
तट पर विशेष व्यवस्था
बाबा समाज सेवी संस्था और कार्तिक मेला आयोजन समिति की ओर से घाट की साफ सफाई की गई। बच्चों को उनके अभिभावकों तक पहुंचाने और गोताखोरों का इंतजाम किया गया था। संस्था के स्वयंसेवक श्रद्धालुओं की मदद करते नजर आए।
भाव विभोर करते रहे भजन
बलुआघाट पर आयोजित भजन संध्या में जाने-माने गायकों ने सूर्य और षष्ठी मइया की महिमा का गुणगान करने वाले भजन सुनाकर भावविभोर किया। कार्यक्र्रम देर रात चलता रहा।
उगते सूर्य को अर्घ्य आज
डाला छठ के व्रत की पूर्णता बुधवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर होगी। व्रती महिलाएं सूर्योदय से पहले घाट पहुंच जाएंगी। विधिविधान से पूजा अर्चना, अर्घ्य देंगी और मीठा खाकर व्रत खोलेंगी।