इलाहाबाद (ब्यूरो)। भाईदूज पर शुक्रवार को बहनों ने भाइयों को तिलक लगाकर उनके दीर्घायु होने और मंगलकामना का आशीष मांगा। टीका करने के बाद बहनों ने भाइयों की मिठाई खिलाई और उनकी आरती उतारी। वहीं भाइयों ने भी बहनों को शगुन का नेग दिया। घरों में पूजा के स्थान पर अल्पना में सूरज, चांद, भाई, बहन के चित्र बनाए गए। अल्पना की पूजा भी की गई। विस्तार से भाईदूज की कहानी भी कही सुनाई गई। बहन-भाइयों का एक दूसरे घर जाकर टीका कराने का सिलसिला शाम तक जारी रहा। परंपरा के मुताबिक बहन के सौभाग्य में वृद्धि के लिए भाइयों ने उनके घर भोजन भी किया। इस अवसर पर घरों में विशेष पकवान बनाए गए।
भाईदूज पर टीका करने से पहले भाई-बहनों ने बलुआघाट सहित यमुना के विभिन्न घाटों पर संग स्नान किया। घाटों पर स्नान करने वालों की भीड़ भोर से ही जुटनी शुरू हो गई थी। मान्यता है कि भाईदूज पर अगर बहनें भाइयों का हाथ पकड़ कर स्नान करती हैं तो वह सदा सुहागिन रहती हैं। भाईदूज पर बहनों ने सुबह से निर्जल व्रत रखा और भाइयों को टीका करने के साथ ही व्रत पूरा किया।
कार्तिक मेले के तहत भाईदूज के दिन मेले में भूले-भटके दो बच्चों को बाबा समाजसेवी संस्थान के कार्यकर्ताओं ने उनके परिजनों से मिलवाया। इसमें बच्ची कोमल कनौजिया और नन्हा रोहित शामिल था। संस्थान के अध्यक्ष पार्षद सतीश केसरवानी की देखरेख में घाट पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा और पूजा के फूलों को यमुना में न विसर्जित करने के लिए जागरूक किया गया। सो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रतिमा और फूलों को निर्धारित गड्ढों में ही विसर्जित किया। संस्थान के स्वयंसेवकों काजू पंडित, अजय केसरवानी, मनोज केसरवानी, धीरज केसरवानी, कैलाश, प्रियम, अर्पित, रवि गौड़, राम, अमित, सुनीता जायसवाल, गोलू सोनकर आदि ने श्रमदान सहित स्नानार्थियों को सहयोग भी किया।