‘बैंडिट क्वीन’ समेत दर्जनों फिल्मों में काम कर चुकी और 31 वर्षों से रंगमंच से जुड़ी अभिनेत्री सीमा विश्वास का मानना है कि थियेटर भले ही संतुष्टि देता है लेकिन ग्लैमर और आर्थिक मोर्चे पर अभी भी पीछे है। दर्शक फिल्म टिकट लेकर देख सकते हैं लेकिन थियेटर के लिए नहीं। थियेटर के प्रति अपनी भावनाओं को अभिनेत्री सीमा विश्वास ने सोमवार को शहर आने पर अमर उजाला के साथ साझा किया। सीमा विश्वास ने कहा कि थियेटर के प्रति उनका मोह कम नहीं हुआ है, मगर दर्शकों की कमी उन्हें अखरती है।
फिल्म में तो कई रीटेक्स के बाद परफेक्ट सीन दर्शक देखते हैं, जबकि थियेटर में तो कलाकार सीधे तौर पर दर्शकों से रूबरू होते हैं। थियेटर कलाकारों को दर्शकों का प्रेम चाहिए।
हेमवती नंदन बहुगुणा पीजी कॉलेज नैनी के असिस्टेंट प्रोफेसर भास्कर शुक्ला के तुलाराम बाग स्थित आवास पर ठहरीं सीमा विश्वास ने कहा कि आधुनिक तकनीकों इसके स्वरूप को बदल दिया है। सिर्फ यही नहीं थियेटर में होने वाले नाटकों के विषय में भी काफी बदलाव आए हैं। विषयों का दायरा बढ़ गया है। युवाओं का लगाव अभी भी थियेटर के प्रति कायम है। बताया कि इलाहाबाद में उन्होंने 1989 में थियेटर किया था। संगम नगरी में थियेटर करने की उनकी ख्वाहिश बरकरार है। अगर मौका मिला तो वह यहां शो जरूर करेंगी।