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बच्चा-बच्चा बने भागीरथ, हर-हर गंगे नारा हो

Tue, 01 Mar 2016 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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माघ मेले के परेड ग्राउंड में माह भर से चल रही गंगा व यमुना जल प्रदूषण निवारण प्रदर्शनी का समापन सोमवार को कवि सम्मेलन के साथ हुआ। जिसमें देशभर से आए कवियों ने अपनी रचनाओं के जरिए गंगा प्रदूषण, उसके संरक्षण के प्रति जनमानस को जागरूक किया। प्रदर्शनी सचिव प्रो. दीनानाथ शुक्ल ‘दीन’ की रचना ‘यदि हम चाहें निर्मल अविरल, बहती गंगा धारा हो, बच्चा-बच्चा बने भागीरथ, हर-हर गंगे नारा हो’, गीता सिंह की रचना ‘मां गंगा मैं तुमसे मिलने आई हूं, अपना पाप धुलने नहीं तेरा हाल पूछने आई हूं’ और वीरेंद्र तिवारी की कविता ‘मैंने एहसान किसी का जताया है क्या, कितने दुख सहे पर किसी को बताया है क्या’ को काफी पसंद किया गया।
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प्रशांत पांडेय ने ‘अविरल गंगा निर्मल गंगा कल-कल बहती जाए, हिम शिखराें से औषधि लेकर जन मानस तक आए’, जनेश्वर मिश्र की कविता ‘गंगा यमुना सरस्वती का संगम यह अनमोल है, इसकी महिमा जग से न्यारी इसका न कोई मोल है’, पीयूष कुमार की ‘ज्ञान दे भक्ति दुलार दे मां, नव वर्ष नूतन निसार दे मां’ की रचनाओं को खूब पसंद किया गया। इसके साथ ही बिहारी लाल अंबर, शिवशंकर कुशवाह, कैलाश नाथ पांडेय, नजर इलाहाबादी, अशोक अग्रहरि, पृथ्वीराज ने भी रचनाएं प्रस्तुत की। सम्मेलन का संचालन साहित्यकार दयाशंकर पांडेय ने किया। प्रदर्शनी में त्रिभुवन नाथ शुक्ल, राजेश पांडेय, डॉ. वरिष्ठ नारायण शुक्ल, डॉ. वंदना शुक्ला, राजेंद्र मिश्रा, मंजू मिश्रा आदि लोग मौजूद रहे।
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