गाजियाबाद के मंदाकिनी टावर की दुर्दशा को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रकरण को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष और नगर आयुक्त को निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर टावर का निरीक्षण कर इसके रख-रखाव के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। छह सप्ताह बाद इसकी रिपोर्ट भी मांगी है। मंदाकिनी अपार्टमेंट रेजीडेंट एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश दिया।
याचिका में कहा गया है कि मंदाकिनी अपार्टमेंट की दशा बेहद खराब है। बिल्डिंग में कई जगह दरारें हैं। सीढ़ियों की रेलिंग टूटी हुई है, जिससे कभी दुर्घटना हो सकती है। बिल्डिंग के फोटोग्राफ भी याचिका के साथ लगाए गए थे। बिल्डिंग में अग्नि शमन उपकरण भी नहीं लगे हैं। खंडपीठ ने कहा कि बिना अग्निशमन उपकरण के बिल्डिंग को एनओसी किस प्रकार से दी गई। जीडीए उपाध्यक्ष और नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर बैठक कर निरीक्षण की तिथि तय करें। निरीक्षण रेजिडेंट एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ किया जाए और बिल्डिंग में जो कुछ भी सुधार की आवश्यकता है, उसे तत्काल कराया जाए।