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शिक्षा मानव संसाधन की जननी : प्रो. पांडेय

Tue, 01 Mar 2016 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि की शिक्षा विद्या शाखा की ओर से सोमवार को ‘अध्यापन शिक्षा कार्यक्रम का नवोत्थान’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी के मुख्य अतिथि बिहार केंद्रीय विवि के पूर्व कुलपति प्रो. जनक पांडेय ने कहा कि आज अध्यापन शिक्षा के बारे में नए ढंग से सोचने की आवश्यकता है। शिक्षा मानव संसाधन की जननी है और मानव संसाधन सभी संसाधनों की जननी है।
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मुख्य वक्ता महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व कुलपति प्रो. केपी पांडेय ने कहा कि शिक्षक को अपने विषय के बारे में उत्कृष्ट ज्ञान होना चाहिए। कहा कि आज का युग तकनीक का है, शिक्षार्थियों को नई तकनीक सिखाकर उन्हें हुनरमंद बनाया जा सकता है। अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. एमपी दुबे ने कहा कि अध्यापन शिक्षा का लक्ष्य वही है, जो शिक्षा का उद्देश्य है। शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण और कौशल विकास है। मूल्य आधारित शिक्षा पर बल देने के साथ ही सिद्धांत एवं अभ्यास पर जोर दिया जाना चाहिए।
अतिथियों का स्वागत प्रो. एसपी गुप्ता ने किया, रंजना श्रीवास्तव ने विषय वस्तु पर प्रकाश डाला। संचालन डॉ. पीके पांडेय ने किया, धन्यवाद डॉ. शैलेश यादव ने किया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि नेहरू ग्राम भारती विवि के कुलपति प्रो. केबी पांडेय ने कहा कि अध्यापक शिक्षा के क्षेत्र में मूल्य आधारित तकनीक का प्रयोग आवश्यक है।
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मुविवि में अध्यापन शिक्षा कार्यक्रम का नवोत्थान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई
उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि की शिक्षा विद्या शाखा की ओर से सोमवार को ‘अध्यापन शिक्षा कार्यक्रम का नवोत्थान’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी के मुख्य अतिथि बिहार केंद्रीय विवि के पूर्व कुलपति प्रो. जनक पांडेय ने कहा कि आज अध्यापन शिक्षा के बारे में नए ढंग से सोचने की आवश्यकता है। शिक्षा मानव संसाधन की जननी है और मानव संसाधन सभी संसाधनों की जननी है।
मुख्य वक्ता महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व कुलपति प्रो. केपी पांडेय ने कहा कि शिक्षक को अपने विषय के बारे में उत्कृष्ट ज्ञान होना चाहिए। कहा कि आज का युग तकनीक का है, शिक्षार्थियों को नई तकनीक सिखाकर उन्हें हुनरमंद बनाया जा सकता है।
 अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. एमपी दुबे ने कहा कि अध्यापन शिक्षा का लक्ष्य वही है, जो शिक्षा का उद्देश्य है। शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण और कौशल विकास है। मूल्य आधारित शिक्षा पर बल देने के साथ ही सिद्धांत एवं अभ्यास पर जोर दिया जाना चाहिए। अतिथियों का स्वागत प्रो. एसपी गुप्ता ने किया, रंजना श्रीवास्तव ने विषय वस्तु पर प्रकाश डाला। संचालन डॉ. पीके पांडेय ने किया, धन्यवाद डॉ. शैलेश यादव ने किया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि नेहरू ग्राम भारती विवि के कुलपति प्रो. केबी पांडेय ने कहा कि अध्यापक शिक्षा के क्षेत्र में मूल्य आधारित तकनीक का प्रयोग आवश्यक है।
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