सार्क देश आपसी समझदारी एवं बातचीत के जरिए दक्षिण एशिया क्षेत्र में हिंसा एवं शांति के बीच चल रहे जद्दोजहद को कम कर सकते हैं। यह बातें पूर्व एयर वाइस मार्शल एवीएम कपिल काक ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रक्षा अध्ययन विभाग एवं सेंटर ऑफ मीडिया स्टडीज की ओर से ‘इफेक्टिवनेस ऑफ रीजनल आर्गनाइजेशन एंड रोल ऑफ मीडिया इन कंफ्लिक्ट मैनेजमेंट इन साउथ एशिया’ आयोजित सेमिनार के दौरान कही। वहीं इंस्टीट्यूट फार डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस के महानिदेशक जयंत प्रसाद ने कहा कि मीडिया में बढ़ती स्थानीयता के कारण दक्षिण एशियाई देशों में खबरों की साझेदारी कम है।
वरिष्ठ पत्रकार प्रभु चावला ने कहा कि किसी तरह के संघर्ष एवं विवाद सुलझाने का जिम्मा मीडिया नहीं ले सकता है। मीडिया विवाद या संघर्ष की स्थिति में रिपोर्ट करता है, यही उसकी जिम्मेदारी है। वह बातचीत का माडरेटर हो सकता है। समापन सत्र में स्वागत प्रो. आरके उपाध्याय ने एवं आभार धनंजय चोपड़ा ने किया। दो दिन चले सेमिनार मेें कोलंबो विवि के अतुला रानासिंघे, डॉ. अकमल हुसैन, रामशरण जोशी, जयशंकर गुप्त, प्रो. हेमंत जोशी, हर्ष वर्द्धन त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।