छह दिन तक एक कमरे में बंद बिस्किट और पानी के सहारे रहने वाली 85 वर्षीय रामदुलारी का बेटा और बहू बिहार से छठ पर्व मना कर मंगलवार को घर लौटे। बेटे को देखते ही लाचार मां उसकी करतूत भूल गईं और बोलीं, तू आ गया बेटा। वहीं जब रेलवे कर्मचारी राजू को लोगों ने फटकारा तो वह उल्टा बिफर पड़ा और बोला, मुझसे जरा सी चूक क्या हो गई इतना बवंडर कर दिया गया। मीडिया में भी बात आ गई। मेरी बदनामी हो गई। अब मैं कैसे काम पर जाऊंगा। हालांकि, वह अपनी करतूत पर शर्मसार था।
बता दें कि काला डांडा हिम्मतगंज में 85 साल की लाचार मां को घर में बंदकर पत्नी के साथ छठ पर्व मनाने रेलवे कर्मचारी राजू बिहार चला गया था। सोमवार सुबह कमरे में बंद वयोवृद्ध रामदुलारी चीखीं तो पड़ोसी जुटे। तब सबको घटना का पता चला। लोगों ने खुल्दाबाद पुलिस को बुला लिया। पुलिस पहुंची और सीढ़ी लगाकर बालकनी में जाकर कमरे का ताला तोड़ा और रामदुलारी को बाहर निकाला। रामदुलारी ने रोते हुए बताया कि बेटा-बहू छह दिन पहले छठ पूजा करने बिहार चले गए और उन्हें कमरे में बंद कर गए। कमरे में बिस्किट और पानी रख गए थे। छह दिन तक एक कमरे में बंद रहने के बाद जब रामदुलारी का धैर्य जवाब दे गया तो वह रोने-चीखने लगीं थीं। पार्षद बबली सोनकर ने बुजुर्ग मां को भोजन कराया। हंगामा बढ़ा तो पुलिस ने फोन कर राजू से बात की। उसने बताया कि वह मंगलवार सुबह तक आ जाएगा।
मंगलवार सुबह जब बिहार से राजू पत्नी संग लौटा तो मां रामदुलारी उसे देख खुश हो गईं। बेटे की करतूत भूलकर उन्होंने उसका हाल पूछा और शिकायती लहजे में बस इतना कहा कि मुझे कमरे में बंद कर गया था बेटा। बेटे राजू ने कहा कि गलती हो गई, लेकिन वह बिफर भी पड़ा। बोला, इतनी बड़ी गलती नहीं कि कोहराम मचा दिया गया। अखबारों और टीवी में खबर आने के बाद इतने लोगों ने मुझे फोन किया कि मैं क्या बताऊं। मैं तो दो दिन के लिए ही गया था, लेकिन वहां फंस गया। खाना-पीना रख तो गया था। इतनी हाय-तौबा क्यों मचा दी गई।
इस पर लोगों ने राजू को फटकारा कि इतनी संवेदनहीनता की और शर्मसार होने की बजाय बोल रहा कि क्यों नाराज हो रहे। तभी महिला संगठन से जुड़ी महिलाएं भी वहां पहुंचीं तो उनसे राजू की तीखी झड़प होने लगी। किसी तरह स्थिति संभालकर पार्षद बबली ने राजू को मां का ख्याल रखने की हिदायत दी और रामदुलारी को उसके साथ भेजा। खुल्दाबाद थाना प्रभारी कौशल कुमार यादव ने बताया कि इस बाबत किसी तरफ से कोई शिकायत नहीं होने से कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही है।