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डेंगू से मौतों पर हाईकोर्ट गंभीर

Tue, 08 Nov 2016 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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court shimla
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डेंगू से लगातार हो रही मौतों पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब तलब कर लिया है। कोर्ट ने पूछा है कि प्रदेश में डेंगू और चिकनगुनिया से अब तक कितने लोगों की मौतें हुई हैं। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में इलाज की क्या सुविधाएं हैं। इन अस्पतालों में डेंगू और चिकनगुनिया के कितने मरीज भर्ती हुए और कितने ठीक हुए हैं। रिपोर्ट में खासतौर से इलाहाबाद की स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश है। कोर्ट ने इलाहाबाद में डेंगू मरीजों के इलाज में होने वाली लापरवाही की जांच मंडलायुक्त को सौंप दी है। उनको 19 दिसंबर तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट के अधिवक्ता बीपी मिश्र के पुत्र पीयूष मिश्र (25) की गत दिनों डेंगू से मौत हो गई थी। बेटे का इलाज कराने के लिए उनको काफी भटकना पड़ा था जिसकी वजह से समय पर उपचार नहीं हो सका। इस व्यवस्था से क्षुब्ध होकर उन्होंने मुख्य न्यायाधीश तथा हाईकोर्ट के कई वरिष्ठ न्यायाधीशों को पत्र लिखा था।
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जस्टिस वीके शुक्ल और जस्टिस एमसी त्रिपाठी की पीठ ने पत्र पर स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया। कोर्ट ने प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य को सूबे में डेंगू और चिकनगुनिया की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष अनिल तिवारी को इस मामले में सहयोग करने के लिए न्यायमित्र नियुक्त कर दिया है। पीठ ने मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय से भी अपेक्षा की है कि वह प्रकरण की सुनवाई में अदालत का पूरा सहयोग करेंगे।


अधिवक्ता बीपी मिश्र के पुत्र पीयूष खुद भी हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते थे। गत 27 अक्तूबर को तेज बुखार आने के बाद उनको निजी अस्पतालों सहित स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में भी भर्ती कराया गया। पिता जब पीयूष को लेकर स्वरूपरानी अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे तो वहां डाक्टर मौजूद नहीं थे। दूसरे दिन एक बजे डाक्टर देखने पहुंचे तब तक मरीज की हालत काफी बिगड़ चुकी थी। उसको डायलिसिस की आवश्यकता थी मगर एसआरएन में डायलिसिस नहीं हो पाया।
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हार कर परिवार वाले उनको लेकर लखनऊ के सहारा अस्पताल ले गए मगर वहां मरीज को भर्ती करने से इंकार कर दिया गया। राममनोहर लोहिया अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग में जगह नहीं होने के कारण मरीज को भर्ती नहीं किया। इसके बाद पीयूष को एक प्राइवेट अस्पताल और फिर अंत में पीजीआई लखनऊ ले जाया गया। मगर तक तक काफी देर हो चुकी थी। पीजीआई में 30 अक्तूबर को पीयूष की मृत्यु हो गई।
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