इलाहाबाद से मुगलसराय के बीच तीसरी रेल लाइन जल्द बिछाई जाएगी, ताकि सवारी गाड़ियों की लेटलतीफी खत्म की जा सके। इलाहाबाद जंक्शन पर फ्लाई ओवर स्वीकृत हो गया है। इसके तैयार होने पर भी ट्रेनें समय से चल सकेंगी। इसके अलावा दिसंबर 2018 तक डेडीकेटेड फ्रंड कोरिडोर का काम पूरा होने से भी ट्रेनों के परिचालन में काफी सुधार आएगा। बुधवार को संवाददाताओं से बातचीत में उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के महाप्रबंधक अरुण सक्सेना ने केंद्र में मोदी सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर एनसीआर की उपलब्धियां के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि इलाहाबाद-मुगलसराय सबसे ज्यादा व्यस्त रूट है। बावजूद इसके काफी प्रयास के बाद ट्रेनों की समयबद्धता 37 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत तक पहुंच गई है। रेल हम सफर सप्ताह के दौरान अफसरों के प्रयास से यह 84 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह बड़ी उपलब्धि है। बताया कि सबसे महत्वपूर्ण माल गाड़ियों का मूवमेंट है, जो 61 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसकी का नतीजा है कि वर्तमान में ज्यादातर पॉवर प्लांटों में कोयला समय से और पर्याप्त मात्रा में पहुंच रहा है। स्थिति यह है कि प्लांटों में 30 के बजाए 40-45 दिन तक का स्टॉक हो गया है। रेलवे के लिए यह भी बड़ी उपलब्धि है। बताया कि रेल हम सफर सप्ताह में यात्रियों से काफी जानकारी प्राप्त हुई। प्रयास होगा कि हर माह इसी तरह थीम आधारित अभियान चलाया जाए।
सीसीएम डॉ.डीके त्रिपाठी ने कहा कि केंद्र सरकार की प्राथमिकता के तहत रेलवे प्रशासन कम कर रहा है। सरकार उत्तर प्रदेश में विशेष ध्यान दे रही है। जनता को जोड़ने के लिए विशेष प्रयास हो रहे हैं। कहा कि यात्री और स्टेशनों पर आने वाली जनता सफाई पर ध्यान दें तो गंदगी स्वत: खत्म हो जाएगी। उन्होंने बताया कि एनसीआर में शंकरगढ़ स्थित प्रयागराज पावर हाउस एवं झांसी स्थित उदयपुर पावर हाउस चालू हो गया है। बताया कि एनसीआर में तकरीबन 10 हजार यात्रियों से अलग-अलग सुविधाओं पर फीडबैक लिया गया। फीडबैक के रूप में किया गया प्रयास अच्छी ग्रेडिंग के रूप में सामने आएगा। इसके पहले सीपीआरओ बिजय कुमार ने दो वर्ष में एनसीआर में हुई कामों का पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन किया।
छिवकी-मानिकपुर-मझिगांव रेल खंड पर इलेक्ट्रिक इंजन वाली ट्रेनें जल्द दौड़ने लगेंगी। इसके साथ यूपी में बस्ती-गोरखपुर, बुढ़वल-सीतापुर कैंट-रोजा, उत्तर प्रदेश-झारखंड एवं मध्य प्रदेश के बीच मेरालग्राम-रेनूकोट के बीच रेल विद्युतीकरण का काम वित्तीय वर्ष 2016-17 में पूरा होने की संभावना है। बुधवार को संवाददाताओं से बातचीत में केंद्रीय रेल विद्युतीकरण संगठन (कोर) के महाप्रबंधक महेश मंगल ने बताया कि इसके साथ बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, केरल, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, जम्मू कश्मीर, हरियाणा में कुल 18 रूटों पर भी इसी वित्तीय वर्ष में काम पूरा होने की संभावना है। बताया कि इस वित्तीय वर्ष में 1600 रूट किलोमीटर (आरकेएम) का विद्युतीकरण करेगा, जबकि रेलमंत्री ने वर्ष 2016-17 के लिए 2567 आरकेएम के नए कार्य की स्वीकृति प्रदान की है। इसमें यूपी में गोरखपुर कैंट-कप्तानगंज-वाल्मीकि नगर 96 आरकेएम, मथुरा-कासगंज-कल्याणपुर 338 आरकेएम, औंचार-जौनपुर 60 आरकेएम का काम भी शामिल है।