दोनों ही लोकसभा में प्रचार एवं रणनीति बनाने का भी काम पटरी से उतरा नजर आया। भाजपा संगठन की बात करें तो यमुनापार एवं महानगर के पदाधिकारियों ने बैठकें तो बहुत की, लेकिन मतदान के दिन आलम ये था कि यमुनापार के तमाम बूथों पर से भाजपा के बस्ते तक भी दिखाई नहीं दिए। यही हाल शहर के कुछ मुस्लिम बूथों के बाहर दिखा। वहां भी भाजपा के बस्ते नहीं दिखाई दिए।
कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, पूर्व मेयर अभिलाषा, पूर्व मंत्री एवं विधायक सिद्धार्थनाथ सिंह, निवर्तमान सांसद केशरी देवी पटेल, पूर्व विधायक नीलम करवरिया की भी चुनाव के दौरान सक्रियता कम दिखी। निवर्तमान सांसद डा. रीता बहुगुणा जोशी की बात करें तो टिकट कटने के बावजूद भी उन्होंने नीरज के समर्थन में इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र में 44 सभाएं की।
इस बीच भाजपा संगठन के भी तमाम नेताओं ने यहां कैंप किया। गुजरात से हार्दिक पटेल, हरियाणा से सांसद संजय भाटिया, सांसद राधा मोहन अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर आदि ने यहां काफी समय भी बिताया, लेकिन चार जून को जो नतीजे आए वह कहीं न कहीं भाजपा के लिए चौंकाने वाले ही साबित रहे।
इस बीच मतगणना के बाद नीरज अपने कुछ परिचितों से यह भी कहते नजर आए कि उनका चुनाव उज्ज्वल रमण समेत पांच लोगों से था। इसमें चार जो भाजपा के ही शीर्ष नेता हैं जिन्होंने पर्दे के पीछे उन्हें चुनाव हरवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी शिकायत भी नीरज ने पार्टी आलाकमान से की है।