टैगोर पब्लिक स्कूल, प्रयागराज में रसायनशास्त्र के प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने बताया, ग्रीष्म की भीषण तपन से बचने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड गैस के उत्सर्जन की दर को कम करना होगा, जिसके लिए पौधारोपण सर्वोत्तम विकल्प है। ऐसा इसलिए कि वातावरण मे उत्सर्जित गैसों को पौधे ही अवशोषित करके वैश्विक तपन को कम कर सकते हैं।
प्रयागराज से आयोजक भाषाविज्ञानी एवं समीक्षक आचार्य पं. पृथ्वीनाथ पांडेय ने बताया इस भीषण गर्मी से समस्त जीवधारियों की रक्षा करने के उद्देश्य से इन दिनों विश्वविज्ञानियों ने दो उपाय विकसित किए हैं, जिनमें से एक का नाम है, 'स्पेस सनशेड', जिसके तहत अंतरिक्ष में दर्पण-जैसी किसी वस्तु के द्वारा सूर्य की किरणों को परावर्तित करके दूसरी दिशा में मोड़ दिया जाएगा। दूसरी व्यवस्था 'क्लाउड सीडिंग' है, जिसमें हवा में लगातार समुद्री जल से बादल बनाकर वातावरण में नमी बनाई जा सकेगी।
'महर्षि विवेकानंद-ज्ञानस्थली' हरदोई के अध्यक्ष आदित्य त्रिपाठी ने बताया, ''वैश्विक सूचकांक के आधार पर प्रति व्यक्ति 450 पेड़ आवश्यक है, लेकिन भारत में यह आंकड़ा 200 से नीचे है। जब तक सरकार अपनी ज़िम्मादारी तय नहीं करती, पर्यावरण तिल-तिल कर मरता रहेगा और मनुष्य अभिशप्त बना, बीमारियों को लादे चलती-फिरती लाश बना रहेगा। ह्यूमन वेलफेअर सोसाइटी हरदोई के अध्यक्ष डॉ. राघवेंद्र कुमार त्रिपाठी 'राघव' ने कहा, ''मैदानी इलाकों में पर्यावरण के स्वास्थ्य के लिहाज से नदियों की उपयोगिता स्वयंसिद्ध है।''