फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी बोर्ड : क्यूआरसी पर करोड़ों खर्च, परिणाम जीरो

Tue, 23 Feb 2016 01:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
यूपी बोर्ड परीक्षा में नकलचियों पर अंकुश लगाने तथा फर्जीवाड़ा रोकने के लिए पहली बार यूपी बोर्ड ने क्विक रिस्पांस कोड (क्यूआरसी) व्यवस्था लागू की। क्यूआरसी के तहत बोर्ड की ओर से सभी केंद्र व्यवस्थापकों को एक मोबाइल ऐप के जरिए आपस में जोड़ा गया। इस व्यवस्था के तहत केंद्र व्यवस्थापक परीक्षा में अनुपस्थित छात्रों का रिकार्ड सीधे बोर्ड को भेजने में सफल होते, लेकिन व्यवस्था लागू करने की हड़बड़ी के चलते क्यूआरसी काम न आ सका। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने नई व्यवस्था लागू करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए और एक फोन कंपनी के साथ समझौता भी किया, लेकिन बात नहीं बनी। 
विज्ञापन

बोर्ड परीक्षा से पहले प्रदेश के सभी केंद्र व्यवस्थापकों को जिला विद्यालय निरीक्षक के जरिए पत्र भेजकर उनसे आठ से बारह हजार रुपये में एंड्रायड मोबाइल खरीदने को कहा गया। मोबाइल खरीदने के बाद बोर्ड की ओर से भेजा गया सिम भी केंद्र व्यवस्थापकों को दे दिया गया। इसके लिए पहले बोर्ड मुख्यालय पर बाद में जिला विद्यालय निरीक्षक के नेतृत्व में केंद्र व्यवस्थापकों को प्रशिक्षण दिया गया। केंद्र व्यवस्थापक परीक्षा के दिन बोर्ड की ओर से लागू की गई क्यूआरसी व्यवस्था का इस्तेमाल ही नहीं कर पाए। कई केंद्र व्यवस्थापक मोबाइल नहीं चला पाए तो कइयों को ऐप ही नहीं समझ आया। इससे वह पहले दिन ही अनुपस्थित परीक्षार्थियों की सूचना नहीं भेज सके। तीन दिन की बोर्ड परीक्षा में बोर्ड के अधिकारी एवं केंद्र व्यवस्थापक इस नई व्यवस्था को लागू नहीं कर सके। सरकार की ओर से परीक्षा केंद्रों पर इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराए बिना लागू की गई इस व्यवस्था पर शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोग सवाल खड़े कर रहे हैं। 
बोर्ड की ओर से 2016 की परीक्षा में कुल 11,627 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। एक अनुमान के मुताबिक यदि सभी केंद्र व्यवस्थापकों ने आठ से 12 हजार रुपये के औसत में 10 हजार रुपये में मोबाइल खरीदा तो इसकी कुल लागत लगभग 12 करोड़ रुपये आएगी। इसी के साथ फोन कंपनी से ऐप तैयार करने में भी लाखों की धनराशि खर्च की गई होगी। सभी केंद्र व्यवस्थापकों को सिम आवंटित किया गया, इसमें भी प्रत्येक केंद्र के हिसाब से कम से कम 500 रुपये खर्च हुए होंगे। इतनी मोटी धनराशि खर्च करने के बाद क्यूआरसी व्यवस्था फेल हो गई। परीक्षा व्यवस्था से पूर्व में जुड़े रहे अधिकारी क्यूआरसी में करोड़ों के घोटाले की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि नकल माफिया के दबाव में पूरी व्यवस्था फेल हो गई। इस संबंध में बोर्ड की सचिव का दावा है कि व्यवस्था सफल होगी। पहली बार लागू क्यूआरसी में आरंभिक अड़चन के बाद परेशानी दूर हो जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें