हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसकी मर्जी के खिलाफ शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि कानून की नजर में नाबालिग की सहमति का कोई अर्थ नहीं है। कोर्ट ने अर्जी के साथ दाखिल मूल पत्रावली से भिन्न टाइपिंग गलती को गंभीरता से लिया है और कहा है कि हलफनामा देने वाले कुशीनगर के गांव खैरातीय थोथाई निवासी लालजी व अधिवक्ता नवनाथ पांडेय इस गलती के लिए जवाबदेह हैं।
कोर्ट ने पैरोकार व वकील दोनों पर पांच-पांच हजार रुपये हर्जाना लगाया है और इसे बार एसोसिएशन के खाते में जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही अधिवक्ता पांडेय को भविष्य में सावधानी बरतने और गलती न दोहराने की नसीहत दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने मुकेश प्रसाद की जमानत अर्जी पर दिया है।
कुशीनगर पडरौना के रामकोला थाने में दर्ज एफ आईआर पर अपर सत्र न्यायाधीश विशेष अदालत पाक्सो ने 24 जनवरी 22 को याची को जमानत पर रिहा करने से इंकार कर दिया। जिस पर यह अर्जी दाखिल की गई थी। पीड़िता के पिता ने नाबालिग लड़की को 30 हजार रुपये के साथ बरगला कर अपहृत करने का आरोप लगाया है।
16 साल की लड़की के बरामद होने और बयान दर्ज किए जाने के बाद नौ दिन देरी से एफआईआर दर्ज कराई गई है। याची का कहना है कि लड़की ने अपनी मर्जी से उसके साथ शादी के लिए संबंध बनाए हैं। डॉक्टरी रिपोर्ट में उसकी आयु 18 साल बताई गई है।कोर्ट ने कहा कि लड़की ने जबरन संबंध बनाने का बयान दर्ज कराया है। नाबालिग की सहमति का कोई अर्थ नहीं है। लड़की के बालिग होने का कोई दस्तावेजी साक्ष्य नहीं है। इस पर कोर्ट ने राहत देने से इंकार कर दिया है।