वन विभाग के दैनिक कर्मियों का मामला, दिसंबर 2018 से न्यूनतम वेतन देने का आदेश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वन विभाग के दैनिक और अस्थायी कर्मचारियों को नियमित कर्मियों के न्यूनतम वेतन के बराबर वेतन का भुगतान करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर राज्य सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने दैनिक वेतनभोगियों को एक दिसंबर 2018 से न्यूनतम वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया है और विभागीय अधिकारियों के दुर्भावनापूर्ण कार्य करने पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव वन विभाग से दो सप्ताह में व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। याचिका की सुनवाई 16 अक्तूबर को होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने शेख झील पक्षी विहार अलीगढ़ के दैनिक कर्मी इशाक मोहम्मद की याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने वन विभाग के सभी अस्थायी, दैनिक संविदा, कैजुअल, तदर्थ जैसे कर्मियों को न्यूनतम वेतन के बराबर वेतन देने का निर्देश दिया है। न्यूनतम वेतन का भुगतान एक दिसंबर 18 से होना था मगर सरकार ने इसके लिए धनराशि ही जारी नहीं की। कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता नीरज त्रिपाठी से इस संबंध में जानकारी मांगी थी। बताया गया कि सरकार ने 13 अगस्त 2019 को संशोधित आदेश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में जारी पूर्व के आदेश को वापस ले लिया है। 13 अगस्त 2019 के इस आदेश को भी संशोधन अर्जी से चुनौती दी गई है।
कोर्ट ने कहा कि अपर महाधिवक्ता को सरकार का पक्ष रखने को बुलाया गया। आदेश का पालन करने के बजाय विचाराधीन मामले में बिना कोर्ट की अनुमति के निर्देशों का पालन करने के आदेश को वापस ले लिया गया। कोर्ट ने सरकार की इस कार्यवाही को प्रथम दृष्ट्या दुर्भावनापूर्ण करार दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार के 13 अगस्त 19 के आदेश पर रोक लगा दी है और प्रमुख सचिव से ऐसा करने पर व्यक्तिगत हलफनाम मांगा है।