प्रयागराज। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में धर्म, आस्था, शिक्षा और न्याय के केंद्र प्रयागराज के राजनितिक, आर्थिक, सामाजिक गौरव का उल्लेख करते हुए लगातार हो रहे क्षरण की ओर मुख्यमंत्री ध्यान आकृष्ट किया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास बार एसोसिएशन केस में कहा है कि जहां हाईकोर्ट की प्रधानपीठ हो, अधिकरण भी वहीं गठित होना चाहिए ताकि न्यायिक अनुशासन कायम रहे। प्रस्तावित अधिकरण के निर्णय के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में होगी। हाईकोर्ट में विधिक मुद्दों पर पुनरीक्षण हो सकेगा। शिक्षा अधिकरण लखनऊ में बनाना सुप्रीम कोर्ट के मद्रास बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ, एल चन्द्र कुमार बनाम भारत संघ में प्रतिपादित विधि सिद्धांतों के विपरीत है। विधेयक में संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 के उपबंधों को दरकिनार किया गया है। ऐसे ही पंजाब हरियाणा की पूर्णपीठ ने सेवा अधिकरण गठन पर रोक लगा दी है।
बार एसोसिएशन का कहना है कि इलाहाबाद से तमाम सरकारी कार्यालयों और मुख्यालयों को लखनऊ ले जाने की साजिश चल रही। कई महत्वपूर्ण संस्थाओं राजस्व परिषद, पुलिस मुख्यालय, शिक्षा निदेशालय आदि को लगभग यहां से हटा लिया गया है। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार में कटौती का प्रयास हो रहा है जो सुप्रीम कोर्ट के नसीरुद्दीन केस का उल्लंघन है। इसी केस से लखनऊ पीठ के क्षेत्राधिकार में केवल दो कमिश्नरी को शामिल किया गयाहै। शेष प्रदेश के जिले इलाहाबाद की प्रधानपीठ के क्षत्राधिकार में शामिल किया गया है।