याची ने इसी आदेश को चुनौती दी थी। तर्क दिया कि आदेश पारित करने से पहले राज्य परियोजना निदेशक ने उसका पक्ष नहीं सुना। साथ ही उसे न तो शिकायत की प्रति दी गई और न ही कोई आरोप पत्र दिया गया। उसके खिलाफ एकतरफा आदेश पारित कर दिया।
कोर्ट ने भी पाया कि प्रतिवादियों ने शिकायत पर याची को सुनवाई का कोई मौका नहीं दिया। कोर्ट ने इसे गलत माना। कहा कि बिना सुनवाई के आदेश पारित करना सही नहीं है। कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य परियोजना निदेशक के आदेश पर रोक लगा दी और याची के प्रत्यावेदन पर नए सिरे से सुनवाई करने का आदेश पारित किया।