फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Allahabad High Court :  सुनवाई का मौका दिए बिना आदेश पारित करना गलत

Tue, 05 Jul 2022 10:19 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कोर्ट ने राज्य परियोजना निदेशक लखनऊ सहित अन्य प्रतिवादियों को याची के प्रत्यावेदन पर नए सिरे से सुनवाई कर आदेश पारित करने का निर्देश दिया। साथ ही याची को शिकायत की एक प्रति भी मुहैया कराने का निर्देश दिया।
विज्ञापन
court new - फोटो : istock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रतिनियुक्ति पर जिला समन्वयक (सामुदायिक मोबिलाइजर) के पद पर आजमगढ़ में तैनात किए गए सहायक अध्यापक को सुनवाई का मौका दिए बिना फिर से उन्हें मूल पद पर भेजने के राज्य परियोजना निदेशक लखनऊ के आदेश पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही कहा है कि सुनवाई का मौका दिए बगैर आदेश पारित करना गलत है।

विज्ञापन



कोर्ट ने राज्य परियोजना निदेशक लखनऊ सहित अन्य प्रतिवादियों को याची के प्रत्यावेदन पर नए सिरे से सुनवाई कर आदेश पारित करने का निर्देश दिया। साथ ही याची को शिकायत की एक प्रति भी मुहैया कराने का निर्देश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव जोशी ने नूरुल हुदा की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया।


कोर्ट में याची की तरह से तर्क दिया गया कि वह बलिया में सर्व शिक्षा अभियान के तहत सहायक अध्यापक (उर्दू) के पद पर नियुक्त हुआ था। इसके बाद उसे जिला समन्वयक (सामुदायिक मोबिलाइजर) के पद पर आजमगढ़ में तैनात किया गया। बाद में एक सियासी व्यक्ति की शिकायत पर उसे फिर से उसके मूल पद पर तैनात कर दिया गया। मूल पद पर तैनाती का आदेश जिला बेसिक शिक्षाधिकारी की अनुशंसा पर राज्य परियोजना निदेशक लखनऊ ने अपने 27 नवंबर 2021 के आदेश के तहत किया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

याची ने इसी आदेश को चुनौती दी थी। तर्क दिया कि आदेश पारित करने से पहले राज्य परियोजना निदेशक ने उसका पक्ष नहीं सुना। साथ ही उसे न तो शिकायत की प्रति दी गई और न ही कोई आरोप पत्र दिया गया। उसके खिलाफ एकतरफा आदेश पारित कर दिया।


कोर्ट ने भी पाया कि प्रतिवादियों ने शिकायत पर याची को सुनवाई का कोई मौका नहीं दिया। कोर्ट ने इसे गलत माना। कहा कि बिना सुनवाई के आदेश पारित करना सही नहीं है। कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य परियोजना निदेशक के आदेश पर रोक लगा दी और याची के प्रत्यावेदन पर नए सिरे से सुनवाई करने का आदेश पारित किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें