प्रधानाध्यापिका ने बीएसए के आदेश को दी थी चुनौती
बीएसए ने कहा था कि बच्चे के जन्म के बाद मातृत्व अवकाश नहीं मिलेगा, याची चाइल्ड केयर अवकाश ले सकती है। जब कि याची ने 180 दिन का मातृत्व अवकाश मांगा था। इस मांग को खारिज करने की वैधता को याचिका में चुनौती दी गई थी। यह फैसला न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने सरोज कुमारी की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने बहस की।
इनका कहना था कि मैटर्निटी बैनिफिट एक्ट के तहत महिला को बच्चे के जन्म से पहले व बाद में मातृत्व अवकाश लेने का अधिकार है। यह संसद द्वारा पारित कानून है। बीएसए ने कानून को समझने में गलती की है और वेतन रोकने का आदेश भी अवैध है। कानून के तहत याची को मातृत्व अवकाश पाने का अधिकार है। वह मातृत्व व चाइल्ड केयर अवकाश दोनों ले सकती है, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए बीएसए एटा के आदेश को रद्द कर दिया।