आरोप है कि उमेश राय ने बीजेपी नेता कपिल देव राय के बेटे राजेंद्र राय को बीजेपी छोड़कर अफजाल अंसारी व मुख्तार अंसारी की पार्टी में शामिल करने के लिए कहा। जब उसने बात नहीं मानी तो धमकी देने लगा। जब उसने इस बात की शिकायत पुलिस से करनी चाही तो उसकी गोली मारकर हत्या कर दी। वह घटनास्थल पर ही मर गया।
मामले में उसी दिन मुहम्मदाबाद थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। सत्र न्यायालय ने उमेश राय को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मामले में अफजाल अंसारी और मुख्तार अंसारी का नाम भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी लेकिन इसकी पुष्टि न होने से उनका नाम आरोप से हटा दिया गया था।
उमेश कुमार की ओर से अंगद राय उर्फ झुल्लन राय की ओर से हाईकोर्ट में अपील दाखिल करते हुए फैसले को चुनौती दी गई। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याची/अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि सत्र न्यायालय का फैसला एकतरफा रहा। कोर्ट ने बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया।