इविवि के अधिवक्ता ने दिया तर्क, कहा- यूजीसी के मानकों के अनुसार हो रही भर्ती
इसके विपरीत इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता क्षितिज शैलेंद्र ने कहा कि असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर सीधी भर्ती विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की वर्ष-2018 की नियमावली के अनुरूप की जा रही है। जहां तक संविदा और अतिथि प्रवक्ता पर कार्यरत रहे शिक्षकों के सेवाकाल केअनुभव को अंक प्रदान किए जाने का प्रश्न है तो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की नियमावली अतिथि प्रवक्ताओं को इसकेलिए अयोग्य ठहराती है।
साथ ही संविदा पर नियुक्त शिक्षकों के अनुभव केवल उन्हीं परिस्थितियों में विचार योग्य है जबकि संविदा पर नियुक्ति 2018 की नियमावली के नियम 10 और 13 के अनुसार हुई हो अन्यथा नहीं। यह भी कहा कि हाईकोर्ट स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा दिए गए अंकों का परीक्षण नहीं कर सकता है। क्योंकि, कमेटी विशेषज्ञों की एक टीम है, जो विधि अनुसार समस्त तथ्यों और अभिलेखों का परीक्षण करके ही अंक प्रदान करती है।
इसके साथ ही उन्हीं अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित मानकों को पूर्ण करते हैं। कोर्ट ने तथ्यों को देखते हुए याची गीतांजलि पांडेय, याची अरविंद कुमार सिंह, मधुकर मिश्रा, डॉ. अमिता सिंह व आठ अन्य, ब्रह्मदेव की याचिकाओं को खारिज कर दिया।