इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कौशाम्बी के जिलाधिकारी को आदेश दिया है कि वह चार हफ्ते में भूमि अधिग्रहण का मामला निपटाएं। कोर्ट ने सवाल खड़े किए कि अधिग्रहण के लिए बिना सहमति के भूमिधरी कैसे ली जा सकती है। कोर्ट ने मामले में अगले पांच हफ्ते तक जमीन की यथास्थिति बरकरार रखने का भी निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति वीके बिड़ला व न्यायमूर्ति सौरभ लवनिया की खंडपीठ ने त्रिलोकनाथ सरोज की याचिका पर दिया है।
याची के अधिवक्ता की ओर से तर्क दिया गया कि मंझनपुर तहसील के भकंदा उपरहार गांव में याची की भूमिधरी पर शासन जबरन सड़क बना रहा है। न जमीन का बैनामा लिया गया है और न ही अधिग्रहण किया गया है। इसमें याची की सहमति भी नहीं ली गई। सरकार याची के संपत्ति के अनुच्छेद 300-ए के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन कर रही है। याची ने डीएम को प्रत्यावेदन दिया है, लेकिन उस पर निर्णय नहीं लिया गया।