इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नाम के आगे शेख लिख लेने से कोई ऊंची जाति का नहीं हो जाता है। जाति या वर्ग का निर्धारण व्यक्ति की पारिवारिक पृष्ठभूमि और सामाजिक स्थिति के आधार पर किया जाता है। कोर्ट ने बिजनौर के सहनपुर गांव पंचायत अध्यक्ष मेराज अहमद को पिछड़ा वर्ग की बजाए सामान्य जाति का घोषित करने के कमिश्नर मुरादाबाद के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही जिला स्तरीय समिति को निर्देश दिया है कि सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद याची की जाति का निर्धारण किया जाए।
मेराज अहमद की याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सीडी सिंह की पीठ ने सुनवाई की। याची का कहना है कि वह हकीमनपुर बिजनौर का रहने वाला है। उसके पिता को ठठेरा पिछड़ी जाति का प्रमाणपत्र दिया गया था। याची ने इसी आधार पर पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और जीत गया।
याची अपने नाम के साथ शेख लिखता है। इस आधार पर उसके पिछड़ा वर्ग का होने पर आपत्ति की गई। जिला स्तरीय कमेटी ने उसे पिछड़ा वर्ग का ही माना, मगर इसके खिलाफ अपील पर कमिश्नर ने कमेटी का आदेश रद्द करते हुए याची को सामान्य अगड़ी जाति का घोषित कर दिया।