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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा: गुंडा वही जो करे अपराध की पुनरावृत्ति, हो समाज विरोधी; खारिज की जिला बदर की कार्रवाई

Sat, 29 Jul 2023 10:15 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कोर्ट ने याची के विरुद्ध की गई जिला बदर की कार्रवाई को खारिज करते हुए कहा कि किसी को आदतन अपराधी तब तक नहीं माना जा सकता, जब तक वह अपराध की पुनरावृत्ति न करे और समाज में उसकी छवि एक खतरनाक और खलनायक जैसी न हो।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गुंडा उसी को कहा जा सकता है, जो अपराध की पुनरावृत्ति करें और उसकी आम छवि समाज विरोधी हो। एक मात्र आपराधिक मामले के आधार पर किसी को जिला बदर करना गैरकानूनी और मनमानी कार्रवाई है। यह फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा ने भदोही जिले के रहने वाले याची गुड्डू चौहान की ओर से गुंडा अधिनियम के तहत जिला बदर के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार करते हुए दिया।

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भदोही जिले के गोपीगंज थानाक्षेत्र के महुआरी गांव के रहने वाले गुड्डू चौहान के खिलाफ भदोही के अपर जिलाधिकारी ने थाना प्रभारी गोपीगंज की सूचना पर गुंडा एक्ट की धारा तीन की नोटिस जारी की थी। नोटिस को बिना तामील कराएं गोहत्या के मामले में दर्ज एक एफआईआर के आधार पर याची को छह महीने तक जिला बदर रहने का आदेश दिया। जिला बदर के आदेश को याची ने मंडलायुक्त मिर्जापुर की अदालत में चुनौती दी। मंडलायुक्त ने अपर जिलाधिकारी के आदेश की पुष्टि करते हुए याची की अपील खारिज कर दी।

जिला बदर के अपीलीय आदेश के खिलाफ याची ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याची का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता जीशान मजहर और अभिषेक चंद्रा ने कहा कि याची को न तो नोटिस का तामीला कराया गया और न ही जिला बदर होने के आदेश की जानकारी दी गई। जानकारी के अभाव में याची जिला नहीं छोड़ सका और उसे अचानक गिरफ्तार कर लिया गया और गुंडा एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर दी गई। हालांकि याची जमानत पर जेल से रिहा हो गया लेकिन पुलिस समय- समय पर याची के घर पर धावा बोल देती है। 
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पुलिस और प्रशासन की इस कार्रवाई से याची और उसके परिवार की छवि धूमिल हो रही है। याची के विरुद्ध एकमात्र आपराधिक मुकदमा दर्ज होने के आधार पर गुंडा एक्ट के तहत की गई कार्रवाई अवैधानिक है। कोर्ट ने याची के विरुद्ध की गई जिला बदर की कार्रवाई को खारिज करते हुए कहा कि किसी को आदतन अपराधी तब तक नहीं माना जा सकता, जब तक वह अपराध की पुनरावृत्ति न करे और समाज में उसकी छवि एक खतरनाक और खलनायक जैसी न हो।

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