इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी, न्यायमूर्ति अजित कुमार की खंडपीठ ने प्रयागराज निवासी युधिष्ठिर वर्मा और आयुष पांडेय की ओर से दायर जनहित याचिका पर दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी, न्यायमूर्ति अजित कुमार की खंडपीठ ने प्रयागराज निवासी युधिष्ठिर वर्मा और आयुष पांडेय की ओर से दायर जनहित याचिका पर दिया।
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याचिका में 26 मई 2026 के शासनादेश को चुनौती दी गई है। शासनादेश माध्यम से निवर्तमान ग्राम प्रधानों को छह माह तक प्रशासक नियुक्त किए जाने की व्यवस्था की गई थी। याचिका में उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम-1947 की धारा 12(3-A) की सांविधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई। याचियों का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 243ई के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल निश्चित है। समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है। ऐसे में निर्वाचित पंचायतों के स्थान पर प्रशासक नियुक्त करना संविधान के भाग-नौ की भावना के विपरीत है। तीन अगस्त को मामले की सुनवाई होगी।