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High Court : सिर्फ लंबे समय तक कब्जे में रहने से किसी सार्वजनिक संपत्ति पर अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता

Wed, 01 Jul 2026 11:17 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ नगर निगम की भूमि पर बने आवासीय क्वार्टरों को खाली करने के मामले में याचिका खारिज कर दी। स्पष्ट किया कि बिना वैध दस्तावेज के केवल लंबे समय तक कब्जे में रहने से किसी सार्वजनिक संपत्ति पर कानूनी अधिकार स्थापित नहीं किया जा सकता।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ नगर निगम की भूमि पर बने आवासीय क्वार्टरों को खाली करने के मामले में याचिका खारिज कर दी। स्पष्ट किया कि बिना वैध दस्तावेज के केवल लंबे समय तक कब्जे में रहने से किसी सार्वजनिक संपत्ति पर कानूनी अधिकार स्थापित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने नगर आयुक्त के बेदखली संबंधी आदेश बरकरार रखा।

यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने दिया। शफीकुर रहमान समेत सात लोगों ने याचिका दाखिल कर 15 मई 2026 को नगर आयुक्त की ओर से पारित आदेश और छह जून 2026 को जारी बेदखली नोटिस को चुनौती दी थी। नोटिस में अलीगढ़ के मौजा डोडपुर माफी स्थित नजूल प्लॉट संख्या 78 और 87 पर बने नगर निगम के आवासीय क्वार्टर खाली करने के निर्देश दिए गए थे।

याचियों का दावा था कि नगर निगम ने इन क्वार्टरों का निर्माण अपने कर्मचारियों के लिए कराया था, लेकिन बाद में उनके पूर्वजों को खाली पड़े आवास किराये पर दिए गए थे। उनका कहना था कि वे नियमित रूप से किराया जमा करते रहे। नगर निगम के प्रस्ताव के अनुसार फ्रीहोल्ड के लिए मांगी गई राशि भी जमा कर दी थी। इसलिए उन्हें आवासों से बेदखल नहीं किया जा सकता।

दूसरी ओर नगर निगम ने अदालत में कहा कि याचियों के पास ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि उन्हें कभी विधिवत आवास आवंटित किया गया था या वे नगर निगम के अधिकृत किरायेदार हैं। याची अवैध कब्जाधारी हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि याची कोई दस्तावेज पेश किया, जिससे उनके कब्जे को वैध ठहराया जा सके। जिन रसीदों के आधार पर याची फ्रीहोल्ड का दावा कर रहे हैं, वे उनके पक्ष में कोई कानूनी अधिकार स्थापित नहीं करतीं। प्रस्तुत रसीदों से यह भी साबित नहीं होता कि नगर निगम ने उनसे किराया स्वीकार किया था। कोर्ट ने बेदखली नोटिस में हस्तक्षेप इन्कार कर दिया।

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