हाईकोर्ट ने कहा, सरकार ने अपने विवेक के अनुसार, संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए दो दिन का लॉकडाउन लगाया है। साथ ही कई अन्य पाबंदियां भी लागू की हैं। हालांकि, नए मामलों को देखते हुए यह निरर्थक ही लग रहा। ये उपाय नाकाफी प्रतीत हो रहा है।
आजादी के सात दशक बाद जब बड़े-बड़े उद्योग लग चुके हैं, हम अपने नागरिकों को ऑक्सीजन तक मुहैया नहीं करा पा रहे। यह शर्म की बात है।
-हाईकोर्ट
रोज स्वास्थ्य बुलेटिन जारी हो...ऑक्सीजन की कमी से न जाए जान
- सभी प्रमुख जिलों के प्रमुख सरकारी अस्पताल दिन में दो बार स्वास्थ्य बुलेटिन जारी करें, जिसमें स्वास्थ्य पर अपडेट जानकारियां हों, ताकि अस्पताल में भीड़ कम आए। अस्पताल बड़ी स्क्रीन पर मरीजों के ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल की जानकारी दे सकते हैं, इससे भी भीड़ कम होगी, संक्रमण रुकेगा।
- हर जिले के पोर्टल पर अस्पताल में खाली बेड की संख्य व भर्ती मरीजों की सूचना दें। अखबारों और जन सूचना माध्यमों का इस्तेमाल करें।
- सिर्फ निगेटिव एंटीजन रिपोर्ट पर मरीज को अस्पताल से बाहर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसे मरीजों को एक हफ्ते गैर कोविड वार्ड में शिफ्ट करें।
- सरकारी अस्पतालों में उचित मात्रा में दवाएं, इंजेक्शन, खासतौर से रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की सप्लाई निर्बाध जारी रहे। हर कीमत पर तय करना होगा कि किसी भी मरीज की जान ऑक्सीजन न मिलने की वजह से न जाए।
- संविदा पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को भर्ती करें। जांच के सैंपल लेने, जांच करने, डाटा जमा करने में भी लोगों को काम पर लगाएं। इससे समय पर जांच रिपोर्ट दी जा सकेगी। दुर्भाग्य है, प्रमुख शहरों में भी अब तक 1% आबादी की जांच तक नहीं हो सकी है।
- एंबुलेंस की संख्या बढ़ाएं, इन एंबुलेंस में जीवन रक्षा के लिए आवश्यक उपकरण लगे होने चाहिए।