कोर्ट ने राजस्व सचिव को निर्देश दिया है कि वह परीक्षण कर तय करें कि कौन से सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए ताकी भारी संख्या में खारिज कर मुकद्दमे तय करने की खानापूर्ति कर उद्देश्य हासिल न किया जाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा लंबित राजस्व वादों की संख्या घटाने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की है। किंतु कहा है कि राजस्व अधिकारी जिस तरीके से केस निपटा रहे उनका अनुमोदन नहीं किया जा सकता।
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कोर्ट ने राजस्व सचिव को निर्देश दिया है कि वह परीक्षण कर तय करें कि कौन से सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए ताकी भारी संख्या में खारिज कर मुकद्दमे तय करने की खानापूर्ति कर उद्देश्य हासिल न किया जाए। कोर्ट ने राजस्व सचिव से उठाए गए सुधारात्मक कदमों की जानकारी के साथ हलफनामा मांगा है। जनहित याचिका की सुनवाई 29 जनवरी को होगी।
यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमके गुप्ता तथा न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने बलिया जिले की तहसील सिकंदरपुर बार एसोसिएशन की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
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याची का कहना है कि राज्य सरकार ने सर्कुलर जारी कर राजस्व वादों की संख्या कम करने का निर्देश दिया है। जिस पर राजस्व अधिकारी भारी संख्या में मुकद्दमे अदम पैरवी में खारिज कर रहे हैं। मुकद्दमे पुनर्स्थापन अर्जी स्वीकार की जा रही क्योंकि अधिकारियों को पता है कि अवैध आदेश जारी किया था। इससे मुकद्दमों की संख्या घटने के बजाय बढ़ रही है।
मुकद्दमे मेरिट पर तय नहीं हो रहे। याची का यह भी कहना है कि तहसील से आदेश सीट की सत्यापित कापी नहीं दी जा रही है जिससे दाखिल केस के साथ आदेश सीट संलग्न करने में असमर्थ हैं। सरकार ने राजस्व अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से मुकद्दमे तय कर संख्या घटाने का निर्देश दिया है।