मामला सत्र न्यायालय में लंबित है। आरोपी आवेदक ने सीआरपीसी की धारा 233 के तहत 16 अगस्त 2021 को सत्र न्यायालय केसमक्ष अर्जी देकर डीएनए टेस्ट कराने की मांग की है। उसका आरोप है कि अभियोजन ने गलत कहानी प्रस्तुत की है। घटना के दिन वह था ही नहीं। वह ऋण के भुगतान के संबंध में दिल्ली गया था। डीएनए टेस्ट से यह सुनिश्चित हो जाएगा कि जांच के दौरान घटनास्थल से एकत्र किए गए रक्त के नमूने और उसकेपरिवार के सदस्यों के रक्त के नमूने एक हैं।
यह भी कहा गया है कि महिला की मौत कहीं और हुई थी। ऐसे में जांच अधिकारी ने घटनास्थल की गलत नक्ष नजर तैयार की थी। जांच अधिकारी ने मृतक के खून से सने कपड़ों के साथ खून से सने मिट्टी (कीचड़) के नमूने डीएनए जांच के लिए फोरेंसिक प्रयोगशाला के समक्ष नहीं भेजे। इसलिए डीएनए टेस्ट जरूरी है। सत्र न्यायालय ने अर्जी को 11 अक्तूबर को खारिज कर दिया। याची सत्र न्यायालय केफैसले को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी। हाईकोर्ट ने अर्जी को स्वीकार करते हुए डीएनए जांच का आदेश दे दिया।