याची के अधिवक्ता विभू राय की ओर से तर्क दिया गया कि प्रवीण कुमार की मौत के बाद नियम के तहत नियुक्ति की मांग की थी, जिसे इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने निरस्त कर दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के मामले में इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) की कार्यपरिषद की ओर से खारिज किए गए निर्णय को रद्द कर दिया है। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को छह सप्ताह में मामले में नए सिरे से निर्णय लेने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अट्टू रहमान मसूदी ने निशा मिश्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
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याची के अधिवक्ता विभू राय की ओर से तर्क दिया गया कि प्रवीण कुमार की मौत के बाद नियम के तहत नियुक्ति की मांग की थी, जिसे इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने निरस्त कर दिया। कार्यपरिषद ने अनुकंपा नियुक्ति को किस आधार पर निरस्त किया इस संबंध में कोई जानकारी और तथ्य नहीं दिया गया। कोर्ट ने मामले में गुण-दोषों पर राय व्यक्त किए बिना इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को मामले में नए सिरे से विचार करते हुए छह सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया।