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Allahabad High Court: किसान को बढ़ी दर से अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा अदा करने का आदेश

Fri, 06 Mar 2026 01:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण को 44 साल पहले अधिगृहीत भूमि के मुआवजे का भुगतान किसान को बढ़ी दर पर करने का आदेश दिया है। हालांकि, अपील करीब 24 साल की देरी से दाखिल होने के कारण ब्याज अदा करने की मांग मानने से इन्कार कर दिया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण को 44 साल पहले अधिगृहीत भूमि के मुआवजे का भुगतान किसान को बढ़ी दर पर करने का आदेश दिया है। हालांकि, अपील करीब 24 साल की देरी से दाखिल होने के कारण ब्याज अदा करने की मांग मानने से इन्कार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की अदालत ने गाजियाबाद (अब गौतमबुद्ध नगर) निवासी किसान मांगेराम की अपील स्वीकार करते हुए दिया है।

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नोएडा प्राधिकरण को गिजहौड़ गांव की प्रश्नगत जमीन के मुआवजे का भुगतान 31 के बजाय 34 रुपये प्रति वर्गगज की दर से करना होगा। इससे पहले जिला अदालत ने 1993 में मुआवजे को नौ से बढ़ाकर 31 रुपये किया था। याची ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए बढ़ी हुई दर से मुआवजे की मांग की थी। कोर्ट ने पाया कि सुप्रीम कोर्ट पांच जनवरी 1982 को जारी अधिसूचना से गिजहौड़ गांव की अधिग्रहीत जमीनों के लिए 34 रुपये प्रति वर्गगज का मुआवजा तय कर चुका है। इसी आधार पर याची भी समान मुआवजे का हकदार है।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जिला अदालत का फैसला 1993 में आया था, लेकिन किसान ने इसके खिलाफ अपील 2018 में दाखिल की और कोर्ट फीस 2025 में जमा की। इस 24 साल नौ महीने की देरी के चलते कोर्ट ने आदेश दिया कि किसान को नौ अप्रैल 1993 से आठ सितंबर 2025 तक की अवधि के लिए बढ़े हुए मुआवजे पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा।

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