मामले में याची के खिलाफ उसकेभाई विकास शर्मा ने 2009 में आईपीसी की धारा 302 के तहत एफआईआर दर्ज कराकर भाई राजीव कुमार शर्मा की हत्या का आरोप लगाया। मामले में सत्र न्यायालय बुलंदशहर ने याची को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। याची ने सत्र न्यायालय केफैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। कोर्ट ने सुनवाई के बाद पाया कि याची का इरादा अपने भाई राजीव कुमार की हत्या करने का नहीं था। उसका इरादा केवल शारीरिक चोट पहुंचाने का था।
दोनों भाइयों में खेत की सिंचाई पहले करने को लेकर झगड़े का जुनून सवार हो गया, जो कि बिना किसी पूर्व नियोजन से हुआ था। याची ने उस पर फायर कर दिया। घटना के पछतावे के कारण याची ने अपनी पत्नी केमाध्यम से दूसरे भाई को जानकारी देकर उसकी जान बचाने का भी प्रयास किया। कोर्ट ने कहा कि याची 12 साल से अधिक समय से जेल में है। अत: उसने अपने किए गए अपराध के तहत सजा भुगत ली है। लिहाजा, अन्य किसी मामले में वह हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है तो उसे तुरंत रिहा कर दिया जाए।