कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर 14 सितंबर 21 को बच्चे को माता-पिता की अभिरक्षा में सौंपने का आदेश दिया था। जिसके खिलाफ एसएलपी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी और एक हफ्ते में बच्चे को माता पिता को सौंपने का निर्देश दिया।
खुल्दाबाद एसएचओ द्वारा पेश नाबालिग अशवाद हुसैन को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसके माता-पिता शाजिया नफीस व अशरफ अली को सौंप दिया है और पुलिस को उनके घर तक सुरक्षित पहुंचाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने जिलाधिकारी प्रयागराज संजय कुमार खत्री व अन्य अधिकारियों के खिलाफ अवमानना आरोप निर्मित करने के लिए पांच जुलाई को हाजिर होने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने अशवाद हुसैन की अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
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मालूम हो कि कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर 14 सितंबर 21 को बच्चे को माता-पिता की अभिरक्षा में सौंपने का आदेश दिया था। जिसके खिलाफ एसएलपी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी और एक हफ्ते में बच्चे को माता पिता को सौंपने का निर्देश दिया। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया तो कोर्ट ने एसएचओ खुल्दाबाद को बच्चे को पेश करने का निर्देश दिया था।
याची सहित एसएचओ एवं माता पिता हाजिर हुए। जिस पर कोर्ट ने तत्काल बच्चे को माता-पिता को सौंपने का आदेश दिया। जिलाधिकारी का कहना था कि अवमानना याचिका हाईकोर्ट के बजाय सुप्रीम कोर्ट में होनी चाहिए। कोर्ट ने विपक्षियों को आरोप पत्र निर्मित करने के लिए तलब किया है।